हाड़ कपाने वाले ठंड का कहर, फसल बचाने के लिए जूझ रहे झारखंड के किसान

    हाड़ कपाने वाले ठंड का कहर, फसल बचाने के लिए जूझ रहे झारखंड के किसान

    रांची (RANCHI): झारखंड के कई जिलों में इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन के साथ-साथ खेती पर भी गहरा असर डाला है. लगातार गिरते तापमान के कारण खेतों में लहलहा रही फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है. राज्य के विभिन्न हिस्सों में दलहन, तिलहन के साथ-साथ आलू, टमाटर और अन्य सब्जियों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है.

    राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है. इस अत्यधिक ठंड का सीधा असर फसलों की बढ़वार पर पड़ रहा है. झारखंड में हजारों हेक्टेयर भूमि में दलहन और तिलहन की खेती होती है, वहीं बड़ी संख्या में किसान सब्जी उत्पादन पर भी निर्भर हैं. आमतौर पर इन फसलों से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है और उनकी आजीविका मजबूत रहती है, लेकिन इस बार मौसम की मार से उत्पादन घटने का खतरा मंडरा रहा है.

    किसानों का कहना है कि अत्यधिक ठंड के कारण फसलों का विकास रुक गया है और पौधे कमजोर हो रहे हैं. खास बात यह है कि कई सब्जी और तिलहन फसलें बीमा के दायरे में नहीं आतीं, जिससे नुकसान की स्थिति में किसानों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल पाती. 

    इस विषय में कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मौसम में दलहन और तिलहन की फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं. अत्यधिक ठंड के कारण पौधों की ग्रोथ रुक जाती है, जिससे पैदावार कम होने की संभावना रहती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, फसलों को ठंड से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका नियमित सिंचाई है. लगातार सिंचाई करने से खेतों में नमी बनी रहती है और ठंड का असर कम होता है. कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे समय-समय पर सिंचाई करें और यदि अधिक नुकसान हो तो किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आर्थिक सहयोग का विकल्प भी अपनाएं.


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