सदन में बोले जयराम-झारखंडी कौन? कैसे होगी पहचान! निजी कंपनियों में भी नहीं दे रहें आरक्षण

रांची (RANCHI) : झारखंड में बाहरी भीतरी का मुद्दा हमेशा से गरम है. यहां स्थानीय कौन है. अब तक यह परिभाषित नहीं है. कैसे झारखंडी की पहचान हो इस मुद्दे पर खूब बहस होती है, लेकिन इसका कोई रास्ता अब तक नहीं निकल सका. बात 1932 की होती है तो उसमें 75% आरक्षण की होती है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान डुमरी विधायक जयराम महतो ने सदन में सवाल में पूछा कि निजी कंपनियों में काम कर रहे कितने मजदूर झारखंड के हैं.
इसमें सरकार ने बताया कि ढाई लाख की करीब पेयरोल में नामित है. इसमें सिर्फ 53000 झारखंडी है. सरकार की ओर से बताया गया कि स्थानीय को आरक्षण के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है.
इस पर डुमरी विधायक जयराम महतो ने कहा के कोर्ट ने दिसंबर के बाद रोक लगाया है. आखिर इससे पहले सरकार के आदेश को क्यों नहीं तामिल किया गया? क्यों नहीं 75% स्थानीय लोगों को नौकरी में रखा गया. क्या अब ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी?
जयराम महतो ने कहा कि नियोजन नीति 2002 में भी हाईकोर्ट में कैंसिल हुई थी, क्या सरकार अब ऊपरी कोर्ट में चुनौती देगी? कोर्ट में मामला है, आगे किस रास्ते पर सरकार काम जरेगी जिससे झारखंड को लाभ मिले. इसपर मंत्री ने कहा की उच्च न्यायालय में मामला चल रहा है. जब भी आदेश हाई कोर्ट का आएगा, उसके बाद आगे की क्या रणनीति होगी. इस पर सरकार काम करेगी.
रिपोर्ट-समीर
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