दुमका में पेशा कानून के बहाने पूर्व सीएम रघुवर दास ने हेमंत सरकार पर बोला हमला, जानिए क्या कहा 

    दुमका में पेशा कानून के बहाने पूर्व सीएम रघुवर दास ने हेमंत सरकार पर बोला हमला, जानिए क्या कहा 

    दुमका (DUMKA):  अपनी बेबाक अंदाज के लिए जाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सह बीजेपी नेता रघुवर दास दुमका पहुंचे. परिसदन में उन्होंने प्रेस वार्ता की. प्रेस वार्ता के दौरान राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के चुनावी घोषणा पत्र में झामुमो ने यह कहा था कि सत्ता में आने के बाद पैसा कानून लागू करेंगे. 5 वर्ष हेमंत सोरेन पार्ट वन बीत गया दूसरी बार सत्ता पर हेमंत सोरेन काबिज हुए हैं लेकिन पेसा कानून आज तक लागू नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि पेसा कानून हमारे जनजाति समाज का सुरक्षा कवच है। आज जनजाति समाज पर चौतरफा हमला हो रहा है। उसकी संस्कृति पर हमला हो रहा है. अस्तित्व पर हमला हो रहा है. आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक हर तरफ से हमला हो रहा है.

    सत्ता में रहते PFI को किया था बैन, हेमंत राज में फल फूल रहा है PFI

    रघुवर दास ने कहा कि संथाल परगना प्रमंडल में अवैध घुसपैठी होने के कारण राज्य अशांति की ओर अग्रसर है. वर्ष 2018 में जब वह मुख्यमंत्री थे तो पाकुड़ की एक घटना के बाद उन्होंने PFI पर प्रतिबंध लगाया था. झारखंड पहला राज्य था जिसने PFI को प्रतिबंधित किया था. आज हेमंत राज में PFI फिर से फल फूल रहा है, जो राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है. ऐसी स्थिति में पेसा कानून लागू होना बहुत जरूरी है.

    एक ग्रुप लगा है राज्य को ईसाई प्रदेश बनाने में तो दूसरा ग्रुप लगा है इस्लामिक प्रदेश बनाने में

    रघुवर दास ने कहा कि राज्य में एक ग्रुप लगा है ईसाई प्रदेश बनाने में तो दूसरा ग्रुप लगा है इस्लामिक प्रदेश बनाने में, जो चिंता का विषय है. अगर यही स्थिति रही तो आने वाले 5 से 10 वर्षों में आदिवासी विलुप्त हो जाएगा. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस और झामुमो आदिवासी समाज को वोट बैंक बनाकर रखे हुए है.

    एक और हूल की जरूरत, बरसात के बाद रघुवर दास गांव गांव करेंगे पदयात्रा

     आदिवासी समाज को हमेशा भाजपा का भय दिखाया जाता है. उन्हें बताया जाता है कि अगर बीजेपी आएगी तो जल, जंगल, जमीन लूट लेगा, रीति रिवाज खत्म कर देगा. रघुवर दास ने कहा की जो जल, जंगल, जमीन लूट रहा है, रीति रिवाज खत्म कर रहा है, वही जल, जंगल, जमीन और रीति रिवाज बचाने की बात कर रहा है. उन्होंने कहा कि बरसात के बाद वह गांव गांव पदयात्रा करेंगे क्योंकि जनजाति समाज व संस्कृति को बचाने के लिए एक और हूल क्रांति की जरूरत है.

    रिपोर्ट: पंचम झा 


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