बड़ी खबर: 30 साल पुराने विस्फोट केस में फंसे पूर्व CM चंपाई सोरेन, अदालत ने तय किए आरोप, अब शुरू होगा ट्रायल

    बड़ी खबर: 30 साल पुराने विस्फोट केस में फंसे पूर्व CM चंपाई सोरेन, अदालत ने तय किए आरोप, अब शुरू होगा ट्रायल

    रांची (RANCHI): पूर्व मुख्यमंत्री और सरायकेला से विधायक चंपाई सोरेन की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. करीब 30 साल पुराने विस्फोट मामले में मंगलवार को चाईबासा स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर दिए. इसके साथ ही इस लंबे समय से लटके मामले में अब ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो गई है. यह मामला साल 1993 का है, जब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से बुलाए गए झारखंड बंद के दौरान कथित तौर पर विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा था. अदालत में पेशी के दौरान चंपाई सोरेन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया. साथ ही उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह मुकदमे का सामना करेंगे.

    इन धाराओं में चलेगा मुकदमा

    अदालत ने चंपाई सोरेन के अलावा श्याम नंदन टुडू उर्फ डॉक्टर टुडू और अरुण महतो के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 4, 5 और 6 के तहत आरोप तय किए हैं. इसके साथ ही तीनों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 201 (सबूत नष्ट करना) भी लगाई गई है.

    समय के साथ कम होते गए आरोपी

    मामले से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेश साव ने बताया कि यह केस गम्हरिया थाना कांड संख्या 62/1993 के तहत दर्ज किया गया था. शुरुआत में इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था, लेकिन समय के साथ अधिकांश आरोपियों का निधन हो चुका है. मृत आरोपियों में देव चरण गोस्वामी, डॉन, सोमय मोदी, जोगेश्वर टुडू, सनातन गोराई और देवपाल गोराई के नाम शामिल हैं. अब इस केस में केवल तीन आरोपी ही बचे हैं, जिन पर ट्रायल चलेगा.

    जमानत पर राहत बरकरार

    अदालत ने श्याम नंदन टुडू को पहले से मिली जमानत को बरकरार रखने का आदेश दिया है. इससे पहले तकनीकी कारणों से जमानत की स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ था, जिसे अब सेशन कोर्ट में मामला ट्रांसफर होने के बाद साफ कर दिया गया है.

    अब गवाही का दौर शुरू

    आरोप तय होने के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में अपने गवाहों को पेश किया जाए, ताकि साक्ष्य की प्रक्रिया आगे बढ़ सके. पुलिस के मुताबिक, 18 सितंबर 1993 को झारखंड बंद के दौरान आंदोलन को उग्र बनाने के मकसद से विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल का आरोप है, जिसके आधार पर उस समय प्राथमिकी दर्ज की गई थी.


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