इलाज के इंतजार में बुझ गई आदिवासी रैयत की जिंदगी, रिंग रोड मुआवजा घोटाले ने ली एक और जान

    इलाज के इंतजार में बुझ गई आदिवासी रैयत की जिंदगी, रिंग रोड मुआवजा घोटाले ने ली एक और जान

    धनबाद (DHANBAD): धनबाद के बहुचर्चित रिंग रोड घोटाले से जुड़ा एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां मुआवजे के इंतजार में एक आदिवासी रैयत की इलाज के अभाव में मौत हो गई. मृतक की पहचान रसिक मुर्मू के रूप में हुई है, जिनकी करीब 25 डिसमिल जमीन रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी. इसके बदले उन्हें लगभग 54 लाख रुपये मुआवजा मिलना था, लेकिन बिचौलियों ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए पूरी राशि हड़प ली.

    जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011 में घनसार थाना क्षेत्र के दुहाटांड़ आदिवासी टोला के दर्जनों आदिवासियों की जमीन रिंग रोड के नाम पर ली गई थी. जमीन तो चली गई, लेकिन मुआवजा पीड़ितों तक नहीं पहुंच सका. लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे रसिक मुर्मू इलाज कराने की स्थिति में नहीं थे और रविवार को उन्होंने दम तोड़ दिया.

    इस मामले को लेकर वर्ष 2016 में समाजसेवी रमेश राही ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी. हाल ही में एसीबी की कार्रवाई में 34 आरोपियों में से 17 को जेल भेजा गया है, लेकिन अब तक रैयतों को उनकी मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है. इसी इंतजार के बीच एक पीड़ित की जान चली गई.

    मृतक के भतीजे शहदेव मुर्मू ने बताया कि मुआवजा नहीं मिलने के कारण परिवार की हालत बेहद खराब हो गई थी. कई बार आंदोलन भी किया गया, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. आर्थिक तंगी की वजह से समय पर इलाज नहीं हो सका, जिससे रसिक मुर्मू की मौत हो गई.

    वहीं समाजसेवी रमेश राही ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन अगर समय रहते रैयतों को उनका हक मिल जाता तो एक जान बच सकती थी. उन्होंने मांग की कि घोटाले की राशि जल्द से जल्द वसूल कर पीड़ित आदिवासियों को दी जाए, ताकि भविष्य में किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े.

    रिपोर्ट: नीरज कुमार


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