सुदूर गांव से टोक्यो तक का सफर, झारखंड की बेटियां टोक्यो ओलिंपिक में लहराएंगी परचम..!

    सुदूर गांव से टोक्यो तक का सफर, झारखंड की बेटियां टोक्यो ओलिंपिक में लहराएंगी परचम..!

    रांची| झारखंड की राजधानी रांची के खूंटी जिले की रहने वाली निक्की प्रधान और सिमडेगा की सलीमा टेटे का चयन भारतीय महिला हॉकी टीम में हुआ है। 16 सदस्योयों की  टोक्यो ओलंपिक हॉकी टीम में झारखंड की ये दो बेटियाँ भी है शामिल।ये पहला मौका हैं जब झारखंड की दो हॉकी खिलाड़ी एक ही ओलंपिक में भाग लेगीं। निक्की प्रधान डिफेंडर जबकि सलीमा का चयन मिडफिल्डर के तौर पर किया गया है.

    किसान की बेटी हॉकी के मैदान में मचा रहीं धूम…

    सलीमा टेटे एक किसान की बेटी हैं। जिसका पूरा परिवार खेती करता हैं। ऐसी हालत में निखरी हैं सलीमा की प्रतिभा। सलीमा के पिता भी एक अच्छे हॉकी खिलाडी रह चुके हैं।

    बांस की स्टिक से हॉकी स्टिक तक का सफर…

    निक्की ने अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया है। उनकी कामयाबी से उनके परिजन और कोच बेहद खुश हैं। निक्की के कोच दशरथ  के अनुसार शुरू में उनके पास हॉकी की स्टिक नहीं थी। इस दौरान वो बांस की स्टिक और बांस की गेंद बनाकर ट्रेनिंग करती थी।

    प्रैक्टिस के लिए जाती थी मिलो दूर…

    खूंटी के हेसल गांव ने भारत को कई महिला खिलाड़ी दी हैं लेकिन यहां एक भी हॉकी का मैदान नहीं है। राष्ट्रीय खेल को पहचान दिलाने वाले खूंटी के हेसल गांव में एक भी हॉकी का मैदान नहीं है। खिलाड़ियों के इस गांव में ज्यादातर मकान आज भी कच्चे ही हैं। साथ ही नालियां नहीं रहने की वजह से चारों तरफ गंदगी का अंबार है। ऐसे में गांव की बेटियों को कीचड़ के बीच ही हॉकी प्रैक्टिस करना पड़ता था।

    राज्य की हर लड़की के लिए प्रेरणास्रोत बनी गई हैं ये बेटियाँ…

    बदहाल स्थिति में भी इन दोनों खिलाड़ियों ने न अपना होसला टूटने दिया और न ही कभी कुछ बनने की उम्मीद छोड़ी. ऐसे में ये दोनों बेटियां न केवल राज्य भर की बेटियोँ के लिए प्रेरणास्रोत है बल्कि पूरे देश के लिए एक मिशाल बन गयी हैं। ज़रूरत हैं की इनकी हिम्मत और होसलें का उद्धारण लोग याद रखे और अपने सपनो को एक उड़ान दे।

     

     

     

     

     

     

     


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