अगर आप भी वेस्टर्न टॉयलेट का करते हैं इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान! जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर 

    अगर आप भी वेस्टर्न टॉयलेट का करते हैं इस्तेमाल तो हो जाएं सावधान! जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर 

    देवघर(DEOGHAR): दिनचर्या बदलते ही रोग घेरने की संभावना बढ़ जाती है. बाजार में उपलब्ध मिलावटी समान या हाइब्रिड फल,सब्जी या अन्य खाद्य पदार्थ के सेवन से शायद ऐसा कोई घर होगा जहां परिवार के कोई भी सदस्य रोग से ग्रसित न हो. अधिकांश घरों में पाइल्स रोग से ग्रसित लोग मिल जाएंगे. आज हम आपको रेक्टल ब्लीडिंग से संबंधित जानकारी और उसके समाधान के बारे में बतायेंगे. 

    बीमारी पुश्तैनी भी हो सकता है

    शौच के दौरान खून निकलने को रेक्टल ब्लीडिंग कहाँ जा सकता है. इससे 10 से 15 प्रतिशत ही गंभीर बीमारी हो सकती है. 10 से 12 साल से हो रहे इस समस्या से जूझ रहे हैं और आपकी उम्र 40 के पार है तो क्लोनोस्कोपी करवाना अनिवार्य हो जाता है. अगर आपके खानदान में यह रोग किसी को हुआ होगा तो यह अन्य पारिवारिक सदस्यों को भी हो सकता है जरूरी है आपको समय पर क्लोनोस्कोपी करवाने का. 

    4 ग्रेड में अंकित किया गया है पाइल्स को

    लाइफ स्टाइल चेंज,लगातार कब्जियत की शिकायत, ज्यादा देर बाथरूम में बैठ कर शौच करना,वेस्टर्न टॉयलेट का उपयोग करना इत्यादि पाइल्स रोग होने की संभावना होती है. इसके उपयोग से आपका शौच खुलकर नही होगा और यह मलाशय में धीरे धीरे कठोर बनता जाएगा. जो बाद में बवासीर का रूप ले लेती है. कठोरता के अनुसार 4 ग्रेड में इसको विभाजित किया गया है. 1 और 2 ग्रेड में मामूली दवा से ठीक हो जाता है. लेकिन 3 और 4 ग्रेड वाले को ट्रीटमेंट आवश्यक है. इसका पता शौच के दौरान निकलने वाला खून पर निर्भर करता है. खून दो रंग का निकलता है लाल और मैरून. ऐसा होने पर क्लोनोस्कोपी अवश्य करवाना चाहिए. इससे स्पष्ट पता लगेगा कि पाइल्स है या आपके पेट के अंदर से खून बह रहा है. पाइल्स नही है तो शायद यह कैंसर भी हो सकता है. 

    आवश्यकता अनुसार है ट्रीटमेंट

    विशेषज्ञ डॉक्टर सिबनाथ मंडल के अनुसार पाइल्स के ग्रेड के अनुसार ट्रीटमेंट उपलब्ध है. दवा से ठीक होने वाले को दवा देकर ठीक किया जाता है. वही अगर सर्जरी की आवश्यकता होने पर रबर बैंड तकनीक, दर्दविहीन स्टेपलर सर्जरी,या फिर लेज़र सर्जरी के माध्यम से इसका बेहतर इलाज किया जाता है. 

    दिनचर्या में ये करें

    पाइल्स की समस्या के समाधान  लेने के लिए प्रतिदिन 3 से 4 लीटर पानी पिएं, अत्यधिक फाइबर वाला 5 फल खाएं,हरि सब्जी का सेवन और कसरत करें. आपके परिवार में भी यह समस्या है तो ऊपर लिखे बातों पर अमल करें. 

    रिपोर्ट: रितुराज सिन्हा 


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