बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति: अब बिहार में सवर्ण संभालेंगे राष्ट्रीय लोक मोर्चा,पढ़िए क्यों?

    बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति: अब बिहार में सवर्ण संभालेंगे राष्ट्रीय लोक मोर्चा,पढ़िए क्यों?

    टीएनपी डेस्क:बिहार में उपेंद्र कुशवाहा के एक्शन की आज खूब चर्चा हैं.  राष्ट्रीय लोक मोर्चा में उठे विवाद को खत्म करने के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने विधायक आलोक सिंह को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है.  लव -कुश की राजनीति करने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने राजपूत समाज से आने वाले विधायक को बिहार में पार्टी की कमान सौंप दी है.  आलोक सिंह पार्टी के नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे.  इसके अलावे दो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी बनाए गए है. 

     अभी तक प्रदेश अध्यक्ष का प्रभार संभाल रहे मदन चौधरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी  गई है.  शुक्रवार को पटना में उपेंद्र कुशवाहा ने इसकी घोषणा की.  बता दें कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में एनडीए सरकार के गठन के बाद से ही राष्ट्रीय लोक मोर्चा में विवाद की बात सामने आ रही थी.  उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बना दिया था.  इससे  नाराज होकर कई लोगों ने पार्टी छोड़ दी थी.  इस्तीफा का सिलसिला बढ़ने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रदेश और जिला इकाइयों को भंग कर दिया था. 

     राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार में से तीन विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो के उपेंद्र कुशवाहा से नाराजगी की खूब चर्चा हो रही थी.  तीनों विधायकों ने गत दिनों पार्टी अध्यक्ष की  लिट्टी पार्टी में शामिल नहीं हुए थे.  इसके ठीक बाद उनके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की तस्वीर सामने आई थी.  इसके बाद से पार्टी में टूट की आशंका बढ़ गई थी.  इधर, 16 जनवरी को उपेंद्र कुशवाहा ने माधव आनंद और आलोक सिंह को अपने घर बुलाया। 

     उन्होंने विधायकों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की.  लेकिन इस बैठक में तीसरे विधायक रामेश्वर महतो गैर मौजूद रहे.  पूर्व में नाराज चल रहे तीन में से एक विधायक आलोक सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है.  इससे पहले विधायक माधव आनंद को विधानसभा में सचेतक बनाया गया था.  उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा की राजनीति पिछड़ा वर्ग में आने वाले कुर्मी  और कोइरी  जाति पर केंद्रित रही है.  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू की राजनीति भी इन्हीं जातियों पर निर्भर करती है.  देखना है उपेंद्र कुशवाहा के इस प्रयास का पार्टी की सेहत पर क्या असर होता है?


    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 


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