पटना NEET छात्रा मौत मामला: 15 हजार की नौकरी से करोड़ों की संपत्ति तक, मनीष चंद्रवंशी की भूमिका पर उठते सवाल

    पटना NEET छात्रा मौत मामला: 15 हजार की नौकरी से करोड़ों की संपत्ति तक, मनीष चंद्रवंशी की भूमिका पर उठते सवाल

    Tnp desk- पटना में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद अब पूरे मामले की जांच शंभू गर्ल्स हॉस्टल के बिल्डिंग मालिक मनीष चंद्रवंशी उर्फ मनीष रंजन के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, छात्रा की मौत केवल एक हादसा नहीं बल्कि कई परतों वाला मामला हो सकता है, जिसमें अवैध संपत्ति, रसूख और नेटवर्क की भूमिका की आशंका जताई जा रही है.

    15 हजार की नौकरी और 5 साल में करोड़ों की संपत्ति

    पुलिस जांच में सामने आया है कि मनीष चंद्रवंशी वर्ष 2020 में पटना आया था और उसने एक निजी अस्पताल में मात्र 15 हजार रुपये महीने की नौकरी से अपने करियर की शुरुआत की थी. लेकिन महज पांच वर्षों के भीतर वह पटना और जहानाबाद में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी का मालिक बन गया.जांच एजेंसियों के लिए यह आर्थिक उछाल सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है.

    विवादित जमीन पर बना गर्ल्स हॉस्टल

    पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिस शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा रह रही थी, वह विवादित जमीन पर बना हुआ है. इस इमारत में मनीष स्वयं अपने परिवार के साथ भी रहता था. जमीन के कागजात, स्वामित्व और फंडिंग को लेकर पुलिस अब राजस्व विभाग से भी रिपोर्ट मांगने की तैयारी में है.

    कोरोना काल बना टर्निंग पॉइंट?

    जांच में यह भी सामने आया है कि कोरोना महामारी के दौरान मनीष ने ऑक्सीजन सप्लाई एजेंसी शुरू की, जिसे उसकी आर्थिक उन्नति का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है.

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि:

     • ऑक्सीजन सप्लाई के पीछे कौन-सा नेटवर्क सक्रिय था?

     • क्या सरकारी या निजी अस्पतालों से अवैध तरीके से सप्लाई की गई?

     • क्या इसमें किसी बड़े संरक्षण की भूमिका थी?

    पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और राजनीतिक महत्वाकांक्षा

    मनीष चंद्रवंशी का नाम पहले भी हर्ष फायरिंग के एक मामले में सामने आ चुका है. पुलिस ने जांच के दौरान उसके पास से दो EPIC नंबर (वोटर आईडी) भी बरामद किए हैं, जो पहचान से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं.

    सूत्रों के अनुसार, वह मुखिया चुनाव लड़ने की तैयारी में भी था, जिससे उसके स्थानीय रसूख का अंदाजा लगाया जा रहा है.

    गिरफ्तारी में देरी क्यों?

    NEET छात्रा की मौत के बाद मनीष को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया गया. पुलिस की एंट्री घटना के तीन दिन बाद हुई. हालांकि, बाद में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका के आधार पर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. अब पुलिस उसे रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की तैयारी में है.

    सबसे बड़े सवाल

    इस पूरे मामले में कुछ सवाल ऐसे हैं जो जांच की दिशा तय करेंगे:

     • 15 हजार की नौकरी से करोड़ों की संपत्ति तक का सफर कैसे तय हुआ?

     • ऑक्सीजन सप्लाई के पीछे कौन-सा आर्थिक और राजनीतिक नेटवर्क था?

     • जमीन और प्रॉपर्टी में बेनामी लेन-देन तो नहीं हुआ?

     • क्या हॉस्टल संचालन में नियमों की खुली अनदेखी हुई?

    फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले की जांच हर एंगल से की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. NEET छात्रा की मौत ने न केवल एक परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि सिस्टम, रसूख और अवैध संपत्ति के गठजोड़ पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.


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