बिहार में कोसी का तांडव शुरू! जलप्रलय से 100 से अधिक गांव जलमग्न, भूखे मरने को मजबूर हुए लोग

    बिहार में कोसी का तांडव शुरू! जलप्रलय से 100 से अधिक गांव जलमग्न, भूखे मरने को मजबूर हुए लोग

    सुपौल(SUPAUL): बिहार के सुपौल जिला में जलप्रलय से लोगों की परेशानी बढ़ गई है. जिसकी वजह से सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी घुस गया.आपको बताये कि 6 प्रखंडों के 100 से अधिक गांव जलमग्न हो गया है. कोसी तटबंध के भीतर जल तांडव शुरू हो गया है. पड़ोसी देश नेपाल में हो रही झमाझम बारिश की वजह से सुपौल में जलप्रलय देखने को मिल रहा है. 

    कोसी नदी का जलस्तर 3 लाख 96 हजार क्यूसेक पार

    आपको बताये कि कोसी नदी का जलस्तर 3 लाख 96 हजार क्यूसेक पार होने की वजह से तटबंध के भीतर भारी तबाही शुरू हो गया है. सुपौल जिले के बसंतपुर, निर्मली, सरायगढ़-भपटियाही, किशनपुर, सुपौल सदर प्रखंड इलाके के 100 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया है. सैकड़ों परिवारों के घर जलमग्न हो गए हैं. घरों में बने मिट्टी के चूल्हे, चापाकल और शौचालय तक डूब गए. कोसी तटबंध के भीतर जल तांडव के बीच लोग ऊंचे स्थान की ओर पलायन करने लगे है.

    स्परों की भी निगरानी की जा रही है

    वहीं, सुपौल जिलाधिकारी कौशल कुमार के नेतृत्व में सभी सुरक्षा तटबंधों पर जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को तैनात किया गया है. सबसे अधिक तबाही सुपौल के मरौना अंचल इलाके में देखने को मिला है. यहां घोघररिया, सिसौनी, कदमाहा पंचायत के दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो गई है.

    तंबू बनाकर रहने को मजबूर हुए लोग

    सरकारी स्तर से अबतक बाढ़ से विस्थापित पीड़ित परिवारों के बीच महज पॉलीथिन सीट बांटी गई है. बाढ़ग्रस्त इलाके के लोगों का कहना है कि चूल्हा-चौका डूबने के कारण घरों में नाश्ता और भोजन तक नहीं बन पा रहा है.ऊंचे स्थान पर खुले आसमान के नीचे रहना मुश्किल है. घोघररिया पंचायत में अबतक बाढ़ आश्रय स्थल भवन नहीं होने से लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई है.कुछ लोग सुरक्षा तटबंध और स्परों पर तंबू बनाकर रहने को मजबूर हैं तो अधिकांश लोग घरों में जलभराव के बीच भी रहने को विवश दिखे.


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