समलैंगिकता पर जमकर बरसे राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, कहा हमारी संस्कृति में शादी कॉन्ट्रैक्ट नहीं

    समलैंगिकता पर जमकर बरसे राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर, कहा हमारी संस्कृति में शादी कॉन्ट्रैक्ट नहीं

    पटना(PATNA): मंगलवार यानी 9 अगस्त को पटना में अंतर्राष्ट्रीय चिन्मय मिशन फाउंडेशन के 71 में स्थापना दिवस के मौके पर महामहिम राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर समलैंगिकता पर जमकर बरसे. और उन्होंने गीता के उपदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस पर चुप मत बैठिए, और विरोध में  मत दर्ज कराईए. बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में समलैंगिक विवाह को मंजूरी देने का जो मामला आया है.उसको सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ.

    समलैंगिकता पर जमकर बरसे महामहिम

    आगे महामहिम ने कहा कि समलैंगिकता के विषय पर एक संस्कृति पर आघात करने का प्रयास किया जा रहा था. हमारी संस्कृति में विवाह को कांट्रेक्ट नहीं माना जाता है, लेकिन इसको कॉन्ट्रैक्ट मानते हुए समलैंगिक विवाह को मान्यता देने  का मामला गलत है. इसपर बहुत बहस और चर्चा हो गई, लेकिन क्या आपने समाज ने इस पर अपना मत प्रकट कर दिया? 

    कहा शादी हमारी संस्कृति में कॉन्ट्रैक्ट नहीं

    राज्यपाल ने कहा कि आज यदि हम एक समाज में रहकर अच्छे से व्यवहार कर रहे है, तो वो हमारे संस्कार और संस्कार की देन है. लेकिन इसपर आघात करने का जब प्रश्न आता है, तो  हम चुप क्यों बैठे हैं.भगवत गीता का ही आदेश है, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि चुप बैठने का समय नहीं है. आगे बढ़ो विचार करो और अपना मत सबके सामने रखो. 

    विचारों की ही शक्ति है, संस्कृति की शक्ति है-महामहिम

    वही आगे महामहिम ने कहा कि भारत की शक्ति विचारों की ही शक्ति है, संस्कृति की शक्ति है, आचार्य की शक्ति है, वो  हमारे आध्यात्मिकता में है. हमारी आध्यात्मिकता जितनी श्रेष्ठ है, जितनी सबल है, उतनी साथ हमारी विश्व में बनती जाएगी, उसे अलग से बनाने की आवश्यकता नहीं है. जब हमारा देश 1947 में राजनीतिक रूप से आजाद हुआ तो पूरा विश्व भारत को उम्मीद की नजरों से देख रहा था कि भारत कुछ देगा लेकिन उस समय के नेताओं ने ऐसी इच्छा शक्ति जाहिर नहीं की. 

    जानें महामहिम ने आगे क्या कहा

    जब दुनिया में कैपिटलिज्म, सोशलिज्म, और कम्युनिज्म धराशाई हो गया तो हम इसे अपने यहां अपनाने लगे. विश्व को एहसास हो गया कि भारत से कुछ मिलने वाला नहीं है. लेकिन वह एक संक्रमण काल था और बीते 10 वर्षों से देश को एक ऐसा नेतृत्व मिला है जो एक बार फिर से भारत की श्रेष्ठता को दुनिया में साबित कर रहा है. हमारी वसुधैव कुटुंबकम की जो विचारधारा रही है उस पर अमल किया जा रहा है. अब दुनिया एक बार फिर से भारत को उम्मीद की नजरों से देख रही है.


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