बिहार में शिक्षा क्रांति : बीस वर्षों में सूबे के स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक बदली तस्वीर

    बिहार में शिक्षा क्रांति : बीस वर्षों में सूबे  के स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक बदली तस्वीर

    Patna : वर्ष 2005 से पहले बिहार में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी. सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर थे, शिक्षकों की भारी कमी थी और लगभग 12.5% बच्चे स्कूल से बाहर थे, जिनमें अधिकांश महादलित और अल्पसंख्यक वर्ग के थे. 10वीं के बाद उच्च शिक्षा के अवसर बेहद सीमित थे.

    नीतीश की पहली सरकार में शिक्षा को प्राथमिकता 

    24 नवंबर 2005 को नयी सरकार के गठन के बाद शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई.वर्ष 2005 में जहां शिक्षा का बजट मात्र 4,366 करोड़ रुपये था, वहीं अब 2025-26 में यह बढ़कर 60,964.87 करोड़ रुपये हो गया है, जो राज्य के कुल बजट का लगभग 22 प्रतिशत है. राज्यभर में युद्धस्तर पर नये स्कूलों के निर्माण और पुराने भवनों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ. 2005 में जहां 53,993 विद्यालय थे, अब यह संख्या बढ़कर 75,812 हो चुकी है. सभी पंचायतों में 12वीं तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

    शिक्षकों के बहाली में एतिहासिक कदम 

    शिक्षक बहाली के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कदम उठाए गए . बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से 2,38,744 शिक्षकों, 36,947 प्रधान शिक्षकों और 5,971 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति हुई. स्थानीय निकायों से नियुक्त 3,68,000 शिक्षकों को सक्षमता परीक्षा के बाद नियमित किया जा रहा है। अब राज्य में लगभग 6 लाख सरकारी शिक्षक हैं.

    स्कूल में हाइटेक शिक्षा की शुरुआत 

    विद्यालयों में ‘उन्नयन बिहार योजना’ के तहत हाईटेक शिक्षा की शुरुआत हुई, जिसमें कंप्यूटर लैब, ई-लाइब्रेरी और प्रयोगशालाओं की सुविधा दी गई। ग्रामीण इलाकों में आधुनिक पुस्तकालय और हाईस्पीड इंटरनेट से लैस अध्ययन केंद्र खोले गए.

    ल़डकियों के शिक्षा पर विशेष जोर 

    लड़कियों की शिक्षा में भी बड़ा परिवर्तन आया। 2008 में शुरू की गई साइकिल योजना और पोशाक योजना के बाद अब इंटरमीडिएट स्तर पर छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक हो चुकी है. शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए महादलित और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को स्कूल लाने के लिए टोला सेवक और तालिमी मरकज नियुक्त किए गए। आज लगभग शत-प्रतिशत बच्चे विद्यालयों में नामांकित हैं.

    उच्च शिक्षा को लेकर अभूतपूर्व प्रयास 

    उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने नई ऊंचाइयां छुई हैं. जहां 2005 में केवल 10 विश्वविद्यालय थे, अब 21 राजकीय, 4 केंद्रीय और 8 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। साथ ही IIT पटना, AIIMS पटना, IIM बोधगया, NIFT पटना, IIIT भागलपुर और CNLU जैसे राष्ट्रीय संस्थान राज्य की पहचान बने हैं. अब सभी 38 जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज हैं, पॉलिटेक्निक संस्थान 13 से बढ़कर 46 और आईटीआई 23 से बढ़कर 152 हो चुके हैं। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 35 होने जा रही है.

    सरकार के प्रयास से साक्षरता दर में जबरदस्त वृद्धि 

    इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बिहार की साक्षरता दर अब लगभग 80 प्रतिशत हो गई है, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 2001 के 33.57 प्रतिशत से बढ़कर 73.91 प्रतिशत पहुंच गई है. बिहार में शिक्षा का यह आमूलचूल परिवर्तन केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और दूरदर्शी नीति की झलक है। शिक्षा अब वास्तव में हर बच्चे का अधिकार बन चुकी है , और बिहार इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो चुका है.


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