आईएएस हत्या मामले में आनंद मोहन की बढ़ी मुश्किलें,  2 हफ्ते का मिला समय, जानिए पूरा मामला  

    आईएएस हत्या मामले में आनंद मोहन की बढ़ी मुश्किलें,  2 हफ्ते का मिला समय, जानिए पूरा मामला  

    पटना (PATNA) : बिहार के बाहुबली आनंद मोहन की मुश्किलें बढ़ गई है. पूर्व सांसद के रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक ये याचिका दर्ज कराई गई थी जिसके बाद आज यानी 8 मई को रिहाई मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और आनंद मोहन को नोटिस जारी कर रिहाई पर जवाब मांगा है. वही 2 हफ्ते के अंदर इस पर जवाब देने को कहा है. इसके साथ ही बिहार सरकार से रिहाई से जुड़ा रिकॉर्ड भी देने को कहा है. दरअसल, आनंद मोहन गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या मामले में दोषी करार दिए गए थे. जिसके बाद इनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी. हालांकि, पिछले दिनों बिहार सरकार द्वारा कानून में संसोधन करने के बाद इन्हें रिहाई दे दी गयी.

    बिहार सरकार ने नियमों में बदलाव कर दी रिहाई!

    बिहार सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार जेल मैनुअल 2012 में बदलाव किया था. जिस प्रावधान पर पहले रोक थी अब उसे बादल दिया गया है.सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान हत्या के मामले में जेल से रिहाई का प्रावधान किया गया है. इस बदलाव के बाद आनंद मोहन की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया , और 27 अप्रैल को उन्हे रिहा कर दिया गया. इस फैसले के बाद विपक्षी पार्टी बिहार सरकार पर कई सवाल खड़े कर रही है और उनकी ये कार्यवाई को एक सोची समझी साजिश करार दी गई हैं.   

    आईएएस की हत्या के आरोप में काट रहे थे उम्र कैद की सजा

    5 दिसंबर 1994 को आईएएस अधिकारी कृष्णैया की हत्या कर दी गई थी. दरअसल अधिकार अपने घरलौट रहे थे जिस दौरान उसी रास्ते छोटन शुक्ला के समर्थक जुलूस निकालकर शव का अंतिम संस्कार करने जा रहे थे. जैसे ही डीएम का काफिला गोपालगंज पहुंचा तो उनकी गाड़ी छोटन शुक्ला के अंतिम यात्रा में फंस गई. जिसके बाद आनंद मोहन के भड़काने पर छोटन शुक्ला के समर्थक ने कृष्णैया की हत्या कर दी थी. साल 2007 में इस मामले में हत्या के विरूद्ध सुनवाई हुई जिसमें कोर्ट ने आनंद मोहन को मौत की सजा सुनाई थी. मगर एक साल बाद 2008 में ये सजा उम्र कैद में बदल गई.जिसके बाद से ही वह जेल में उम्र कैद की सजा काट रहे थे. इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी. जिसके बाद से  से वो  सहरसा के जेल में बंद थे. वही 26 अप्रैल 2023 को कोर्ट द्वारा पूर्व सांसद को जेल से रिहा किया गया था.

     

     

     

     

     

     


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