वाह रे झारखंड सरकार! पोस्टिंग के इंतजार में हैं प्रशिक्षु डीएसपी,उधर कम रैंक वाले इंस्पेक्टर बन गए डीएसपी

    वाह रे झारखंड सरकार! पोस्टिंग के इंतजार में हैं प्रशिक्षु डीएसपी,उधर कम रैंक वाले इंस्पेक्टर बन गए डीएसपी

    रांची(RANCHI): झारखंड में 7-10 jpsc परीक्षा को करीब चार साल बीत गए. अलग अलग रैंक आने वाले अधिकारियों को पोस्टिंग मिल गई. लेकिन डीएसपी के रैंक लाने वाले अब सभी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी एक साल से पदस्थापना का इंतजार कर रहे है.परीक्षा पास किए 3 साल बीत गए लेकिन अभी भी प्रशिक्षु डीएसपी का ही टैग लगा हुआ है. जबकि इस बैच से वरीयता सूची से नीचे वाले को 2023 में प्रमोशन दिया गया और डीएसपी बन गए.एक साथ 93 इंपेक्टर को डीएसपी रैंक में प्रोन्नति दी गई. लेकिन 2021 में परीक्षा निकाल कर 2023 के जून में सभी ट्रेनिंग पूरा कर बैठे प्रशिक्षु डीएसपी को पदस्थापना ना देकर अब नक्सल अभियान में लगाया जा रहा है. साथ ही अब यह भी खबर है फिर 64 को डीएसपी के पद में प्रोन्नति मिलने वाली है.

    रिकॉर्ड दिन में हुई 7-10 JPSC परीक्षण

    दरअसल JPSC 7-10 सबसे रिकार्ड दिन में पूरी हुई. परीक्षा के बाद 9 माह के अंदर सभी प्रक्रिया को पूरा करते हुए सभी को नियुक्ति पत्र दे दिया गया. इसके बाद इसमें अन्य विभाग से जुड़े अधिकारियों को जगह जगह पोस्टिंग भी मिल गई. लेकिन इस बैच के 39 प्रशिक्षु डीएसपी को प्रशिक्षण के लिए अलग अलग जिला भेजा गया. हजारीबाग पुलिस एकेडमी से लेकर व्यवहारिक और अन्य प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पोस्टिंग किया जाना था. लेकिन अब तक सिर्फ इंतजार ही इनके हाथ मयस्सर हुआ है.       

    फिर 64 इंस्पेक्टर को प्रमोशन देने की तैयारी

    अब सूचना यह भी है कि पोस्टिंग के बजाय कई प्रशिक्षु डीएसपी को झारखंड के चाईबासा जिला भेज दिया गया. जबकि अन्य प्रशिक्षु डीएसपी को जिला या मुख्यालय में रखा गया है. ऐसे में अब फिर पोस्टिंग की उम्मीद ही इनमें खत्म हो गई है. ऐसे में अब फिर सूचना है कि इंस्पेक्टर रैंक के 64 पुलिस कर्मियों को डीएसपी रैंक में पोस्टिंग देने की तैयारी चल रही है. सभी की रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय में मांगी गई है. जिसके बाद अधिसूचना जारी की जाएगी.

    किसके इशारे पर खेल,कम रैंक वाले को कैसे मिली पोस्टिंग!  

    अब सवाल है कि झारखंड में आखिर किसके इशारे में पूरा खेल चल रहा है. जिसे पहले डीएसपी बन जाना जाहिए था वह इंतजार कर रहा है. और जो जूनियर है उसे ताबड़तोड़ प्रमोशन दे कर पोस्टिंग दी जा रही है. प्रशिक्षु डीएसपी को अब अपने से कम रैंक में जूनियर का आदेश मानना पड़ता है.ऐसे में देखे तो इस पूरे मामले में कोई भी प्रशिक्षु डीएसपी तो कुछ बोलने को तैयार नहीं है. कैमरे के सामने कुछ भी नहीं बोलने को तैयार है. लेकिन जो खेल इनके साथ चल रहा है. इसका दर्द इनके अंदर मौजूद है.

    कब मिलेगी जिम्मेवारी

    ऐसे में झारखंड में कई बार ट्रांसफर पोस्टिंग का खेल बड़े पैमाने पर होता है. इसे लेकर कई बार सवाल उठ चुका है. अब देखना होगा की विभाग और मुख्यालय कब नींद से जगता है और कब प्रशिक्षु डीएसपी को डीएसपी के पद पर पोस्टिंग दी जाती है.जिससे वह किसी अनुमंडल क्षेत्र के पुलिस कप्तान की जिम्मेवारी निभा सके.


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