झारखंड के लिए क्यों चर्चा में है पेसा कानून, हाईकोर्ट की डेडलाइन भी हुई खत्म, जानिए आदिवासियों के अधिकार पर सरकार की क्या है राय

    झारखंड के लिए क्यों चर्चा में है पेसा कानून, हाईकोर्ट की डेडलाइन भी हुई खत्म, जानिए आदिवासियों के अधिकार पर सरकार की क्या है राय

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : पेसा एक्ट (Panchayats Extension to Scheduled Areas (PESA) Act, इन दिनों चर्चा में है. झारखंड में इस कानून की मांग लंबे समय से चली आ रही है. यहां तक की इस कानून की मांग को लेकर झारखंड के खूंटी जिले में आंदोलन भी किया गया. 2018-2019 में इसी पेसा कानून के भ्रम में पत्थलगड़ी आदोलन की शुरुआत हुई थी, जो बाद में हिंसक हो गई थी लेकिन प्रशासन और सरकार के सूझ बूझ से इसे शांत कर दिया गया था. ऐसे में आइए जानते हैं कि पेसा कानून है क्या और आदिवासी समुदाय को इसका लाभ कैसे मिलेगा.

    यह अधिनियम 24 दिसंबर 1996 को अस्तित्व में आया था. पेसा कानून का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के हितों की रक्षा करना था. सरल शब्दों में कहें तो यह लगभग उसी तरह का कानून है जो सामान्य पंचायतों को सशक्त बनाता है. यह उन्हें स्वशासन (Self-government) के लिए प्रेरित करता है. साथ ही उन्हें अपने फैसले खुद लेने के लिए प्रेरित करता है. यह कानून उन्हें सशक्त बनाता है.

    जानिए आदिवासी समुदाय को इससे क्या मिलेगा लाभ?

    पेसा एक्ट आदिवासी समुदाय के प्राकृतिक संसाधनों पर पारंपरिक अधिकारों की भी रक्षा करता है. इस कानून के मद्देनजर झारखंड सरकार ने झारखंड पंचायत प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) का मसौदा (Draft) जारी किया है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों की ग्राम सभाओं को मजबूती मिलेगी. अगर सब कुछ ठीक रहा और मसौदे (Draft) पर आम सहमति बन गई तो झारखंड में यह कानून लागू हो जाएगा.

    जानिए क्या है पेसा कानून के तैयार ड्राफ्ट में

    तैयार किए गए ड्राफ्ट में कहा गया है कि ग्राम सभाओं को पारिवारिक विवाद, सामुदायिक विवाद सुलझाने के साथ ही एकता और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी जाएगी. साथ ही यह भी कहा गया है कि ग्राम सभाओं को आईपीसी के तहत कुछ मामलों को अपने स्तर पर निपटाने का अधिकार भी मिलेगा. इसके पीछे स्थानीय स्तर पर न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की मंशा है.

    जानिए 'पेसा कानून' पर क्या है CM हेमंत का स्टैंड

    वहीं पेसा कानून को लेकर सीएम हेमंत ने कहा कि राज्य सरकार जनता की भावना की अनुरूप ही काम करेगी. इसपर पहले से ही कई चर्चाएं हो रही है. उन्होंने कहा कि इस कानून पर भी बहुत जल्द लोगों को अवगत कराया जाएगा. वहीं राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पेसा कानून पर कहा कि उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इसे लागू करेगी. उन्होंने कहा कि पेसा कानून के तहत पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं. लेकिन झारखंड में अभी तक पेसा कानून लागू नहीं हुआ है. राज्यपाल ने कहा कि उम्मीद है कि नई सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी.

    पेसा कानून के लिए हाईकोर्ट की डेडलाइन हुई खत्म

    पेसा कानून (PESA Act) पर 29 जुलाई 2024 को झारखंड हाईकोर्ट ने आदिवासी बौद्धिक मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दो महीने के भीतर इसे अधिसूचित करने का आदेश दिया था. लेकिन पंचायत राज विभाग ने अभी तक नियमों को लेकर तस्वीर साफ नहीं की है. हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने वर्षों में सरकार आदिवासियों के कल्याण और प्रगति के लिए पेसा कानून के नियम नहीं बना पाई है.

    केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय का आदेश जानिए

    केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने 15 मार्च 2024 को एक आदेश जारी कर पेसा के तहत ग्राम सभा को सशक्त बनाने के लिए मॉड्यूल बनाने को कहा था. इसके तहत लघु वनोपज, लघु खनिज, भूमि हस्तांतरण की रोकथाम, शराब और नशीले पदार्थों के सेवन पर प्रतिबंध, धन उधार पर नियंत्रण, विवादों का परंपरागत तरीके से समाधान जैसे छह बिंदुओं पर अलग-अलग समितियां बनाकर ग्राम सभा को मजबूत बनाने के लिए मॉड्यूल बनाने को कहा गया था. मंत्रालय ने 30 जून 2024 तक प्रारूप मॉड्यूल और 15 जुलाई 2024 तक अंतिम एसओपी प्रारूप तैयार करने को कहा था. इस मामले में मॉड्यूल तैयार कर लिया गया है और चयनित मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. ये ट्रेनर ग्राम प्रधानों को सभी विषयों पर जागरूक करेंगे.

    गौरतलब है कि झारखंड के 24 जिलों में से 13 अनुसूचित क्षेत्र में आते हैं. अगर सब कुछ ठीक रहा तो झारखंड में पेसा कानून लागू हो जाएगा, लेकिन निर्भर करता है कि राज्य सरकर इस दिशा में क्या कुछ कदम उठाती है. वहीं इसपर अंतिम नियमावली नहीं बनने की स्थिति में केंद्र से मिलने वाली राशि भी बंद हो सकती है.

     


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