ये क्या बोल गयें इरफान! राहुल गांधी को बताया स्वर्गीय, अडाणी और अंबानी की आवाज

    ये क्या बोल गयें इरफान! राहुल गांधी को बताया स्वर्गीय, अडाणी और अंबानी की आवाज

    रांची(RANCHI)झारखंड की राजनीति में बयानवीर की संज्ञा पा चुके इरफान अंसारी के एक और बयान से बवाल होना तय माना जा रहा है, राहुल की सदस्यता वापसी पर पूरे देश में कांग्रेसी कार्यकर्ता जश्न में डुबे हैं, इस फैसले को भाजपा की नीयत और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उसके उपेक्षापूर्ण रवैये पर करारा चोट बताया जा रहा है, वहीं इस जीत के जश्न के बीच भी डॉ इरफान अंसारी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया, इरफान ने राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से करते हुए उन्हे स्वर्गीय बता दिया. हालांकि जब पत्रकारों ने इरफान का ध्यान इस ओर दिलाया तो भूल को स्वीकार कर सुधार किया गया, लेकिन दूसरे ही पल उन्होंने राहुल गांधी को अडाणी और अंबानी की आवाज बता दिया.

    तिलक विवाद में सुर्खियों में हैं इरफान

    यहां ध्यान रहे कि अभी चंद दिन पहले ही इरफान अंसारी पर तिलक पोंछने का आरोप लगा था, जिसको लेकर भाजपा के द्वारा काफी बवाल काटा गया था, इरफान के इस कदम को हिन्दुओं का अपमान बताया गया था, और अब उनके द्वारा राहुल गांधी को स्वर्गीय और अडाणी और अंबानी की आवाज बता दिया गया.

    इरफान को ही क्यों होता बार बार टंग ऑफ स्लीप

    हालांकि इरफान के इस बयान को टंग ऑफ स्लीप ही माना जायेगा, लेकिन इसके पहले भी इरफान कई मौके पर विवादित बयान देते रहे हैं, अब इस ताजा बयान के बाद राहुल गांधी की सदस्ता वापसी से हताश- निराश भाजपा को हमला का एक संजीवनी मिल गयी है, वह बार बार इस बयान को दिखलायेगी, सोशल मीडिया पर इसे अपलोड कर राहुल गांधी और इरफान का मजाक बनायेगी. बहुत संभव है कि इस बयान के बाद उन्हे कांग्रेस आलाकमान की ओर से चुप्पी बरतने का आदेश दिया जाय, क्योंकि जीत को जश्न में होश खोने वाले इरफान से कांग्रेस पहले भी परेशान होती रही है. यही कारण है कि जिस दिन कांग्रेस की ओर कोलकता कैश कांड में निलंबन वापस लिया गया था, उस दिन  भी झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर पत्रकारों के बीच से उन्हे खींच कर अपने साथ ले गये थें, तब भी पत्रकारों के बीच राजेश ठाकुर का बर्ताव चर्चा का विषय बना था, दावा किया गया था कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी अपने विधायक की वाक्पटुता पर संशय है, उन्हे पता है कि इरफान बोलते बोलते कुछ भी बोल जाते हैं, और पत्रकार इसी मौके की इंतजार में इरफान का पीछा करते हैं, अपनी इसी कमजोरी को इरफान अपनी राजनीतिक ताकत भी समझते  हैं, उन्हे लगता है कि पत्रकारों का यह झुंड उनकी ओर उनके वाक्पटुता के कारण दौड़ता है, जबकि सच्चाई यह कि पत्रकारों को इरफान से विवादित सुर्खियों की खोज रहती है, जिसे अखबारों का हेडलाइन बनाया जा सके, फिलहाल इरफान ने कल के लिए अखबारों की सुर्खियों को तय कर दिया है.   


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