आदिवासी महिलाओं का नग्न परेड पर झारखंड में बवाल, लोबिन हेम्ब्रम ने हेमंत की चुप्पी पर ही उठाये सवाल

    आदिवासी महिलाओं का नग्न परेड पर झारखंड में बवाल,  लोबिन हेम्ब्रम ने हेमंत की चुप्पी पर ही उठाये सवाल

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK)-मणिपुर में कुकी समुदाय की आदिवासी महिलाओं को नग्न परेड का मामला अब झारखंड में तूल पकड़ने लगा है. आदिवासी-मूलवासियों का प्रखर आवाज माने जाने वाले झामुमो विधायक ने इस प्रकरण पर हेमंत सोरेन की चुप्पी सवाल उठाते हुए तुरंत असम सरकार से दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा है कि हेमंत सरकार किस बात का इंतजार कर रही है? आखिर उसकी चुप्पी कब टूटेगी? भाजपा को कर सकती है, कर रही है, उसकी अपनी रणनीति और चुनावी प्राथमिकताएं है, लेकिन सवाल तो हेमंत सरकार का है, इस अमानवीय घटना पर उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है.

    हालांकि लोबिन हेम्ब्रम इस मुद्दे पर भाजपा को कटघरे में खड़ा करने से साफ तौर पर बचते दिखें और आश्चर्यजनक रुप से हेमंत सोरेन की कथित चुप्पी पर सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने झारखंड सरकार से तत्काल मणिपुर सरकार के बात करने की मांग की है. ताकि आदिवासी महिलाओं के साथ इस कुकृत्य को अंजाम देने वालों को सलाखों के पीछे खड़ा किया जा सके.

    यहां बता दें कि  पिछले तीन महीने से दो समुदायों के बीच जारी हिंसा के कारण सुर्खियों में रहा मणिपुर से अब आदिवासी दो महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार की खबर आयी है. भीड़ के द्वारा इन महिलाओं का नग्न परेड करवाने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

    चार मई की है वारदात

    दर्ज प्राथमिकी के अनुसार यह सनसनीखेज वारदात 4 मई की है, दर्ज प्राथमिकी में भी इस बात का दावा किया गया है कि कांगपोकपी जिले में स्थित एक कुकी बहुल गांव बी. फीनोम को मैतेई युवा संगठन, मैतेई लीपुन, कांगलेइपाक कनबा लुप, अरामबाई तेंगगोल, विश्व मैतेई परिषद के लोगों के द्वारा घेर कर आगजनी और लूट की लोमहर्षक वारदात को अंजाम दिया गया. कुकियों के एक-एक घर को आग के हवाले किया जाता रहा, भीड़ के इस अमानवीय रुप को देखकर कुछ महिलाएं जंगल की ओर भागी. लेकिन भीड़ की नजर उन पर पड़ गयी, और उनका पीछा किया जाने लगा. इस बीच पुलिस भी पहुंचती  है, और महिलाओं और उनके पुरुष साथियों को अपने संरक्षण में लेती है, लेकिन मतैई लोगों की यह भीड़ पुलिस बल को अपना निशाना बनाती है, और पुलिस से इन महिलाओं को खींच कर अपने साथ ले जाती है. उसके बाद उनके साथ सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम दिया जाता है, साथ ही उनका नग्न परेड भी करवाया जाता है. साथ  ही इसका  वीडियो पर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया जाता  है. इसमें एक पीड़िता की उम्र करीबन 20 वर्ष, जबकि दूसरी पीड़ता की उम्र करीबन 40 वर्ष की है, एक और 50 वर्षीय महिला के साथ ही सामूहिक बलात्कार की खबर है. दावा किया जा रहा है कि जब महिलाओं के द्वारा इस घटना का  विरोध किया गया तो एक पीड़िता के भाई और दूसरे के पिता की हत्या कर दी जाती है.

    18 मई तक नहीं दर्ज हुई प्राथमिकी

    लेकिन चार मई से लेकर 18 मई तक इस घटना की प्राथमिकी भी दर्ज नहीं होती, आखिरकार लम्बे संघर्ष के बाद 18 मई को प्राथमिकी तो दर्ज कर ली जाती है, लेकिन किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती, जबकि वीडियो फूटेज में कई चेहरें साफ साफ देखे जा रहे हैं. अब जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, खुद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है, और सरकार को फटकार लगायी है. इसे लोकतंत्र पर काला दाग करार दिया है, जिसके बाद सरकार हरकत में आती दिख रही है, तीन महीने की हिंसा के बाद पहली बार पीएम मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इस अमानवीय कृत्य करार दिया है.

    झारखंड में बन सकता है चुनावी मुद्दा

    साफ है कि इस घटना का असर झारखंड की राजनीति पर पड़ना तय है. अब 2024 में झामुमो इसे चुनावी मुद्दा बनायेगी, और आदिवासी महिलाओं के सम्मान और उनकी सुरक्षा को लेकर भाजपा को कटघरे में खड़ा करेगी.

    ध्यान रहे कि अभी चंद दिन पहले ही एक आदिवासी युवक पर पेशाब किये जाने का वीडियो पर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. उसके बाद आदिवासी संगठनों की ओर बवाल काटा गया था, भाजपा कार्यालय को घेराव किया गया था, अब जबकि हिंसा पीड़ित मणिपुर से आदिवासी महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार और नग्न परेड करवाने का वीडियो वायरल हो रहा है, आदिवासी समाज एक बार फिर से सड़क पर उतर सकता है.


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