बिहार में ना कोई रार ना कोई दरार, बावजूद इसके गर्म है अफवाहों का बाजार! राजद नेता मनोज झा का दावा भ्रम दूर करने की जिम्मेवारी सीएम नीतीश के कंधों पर

    बिहार में ना कोई रार ना कोई दरार, बावजूद इसके गर्म है अफवाहों का बाजार! राजद नेता मनोज झा का दावा भ्रम दूर करने की जिम्मेवारी सीएम नीतीश के कंधों पर

    Patna-राजधानी पटना में जारी सियासी उहापोह और फिजाओं में तैरती पांचवीं वार पाला बदल की खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजद नेता मनोज झा ने कहा कि बिहार में ना कोई रार और ना कोई दरार, हालांकि सीएम नीतीश की गतिविधियां कुछ असहज जरुर है, बावजूद इसके फिजाओं में तैरते इन तमाम सियासी आकलनों को दूर करने की जिम्मेवारी सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार की है. राजद कल भी जहां खड़ा था, आज भी उसी मोड़ पर सीएम नीतीश का इंतजार कर रही है, यह फैसला उनको लेना है कि यह साथ चलेगा या जुदाई की दास्तान लिखी जायेगी.  

    अफवाहों को दूर करने की जिम्मेवारी नीतीश कुमार की

    ध्यान रहे कि कल जब मनोज झा ने देर शाम तक जदयू को अपना स्टैंड क्लियर करने को कहा था और इस बात दावा किया था कि महागठबंधन के मुखिया के रुप में सारे अफवाहों को दूर करने की जिम्मेवारी सीएम नीतीश की है, तो इस सवाल का जवाब जदयू प्रदेश अध्यक्ष कुशवाहा की ओर से दिया गया था, उन्होंने कहा था कि बिहार में महागठबंधन में कोई दुविधा नहीं है, जो भी नारजगी है, वह कांग्रेस की रणनीतियों को लेकर हैं, जिस तरह उसके द्वारा सीट शेयरिंग का मामला फंसाया गया है, उसके कारण ना सिर्फ जदयू बल्कि दूसरे घटक दलों के अंदर भी परेशानी है, इसके साथ ही प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी यह दावा किया था कि हमारे अंदर कोई भ्रम और उहापोह की स्थिति नहीं है, हमारा दृष्टि बिल्कुल साफ है, बावजूद इसके मीडिया में चल रही है, तमाम खबरों का कोई जवाब देने से इंकार किया.

    सीएम नीतीश को मनाने की कोशिश जारी

    इस बीच खबर यह भी है कि सीएम नीतीश को मनाने कोशिश तेज कर दी गयी है, और इसकी जिम्मेवारी सोनिया गांधी के कंधों पर डाली गयी है, दावा किया जा रहा है कि सीएम नीतीश किसी भी कीमत पर विधान सभा भंग कर चुनाव में जाना चाहते हैं, लेकिन राजद सुप्रीमो नीतीश कुमार के इस स्टैंड से सहमत नहीं है, अब देखना होगा कि सोनिया गांधी की ओर से इस विवाद का क्या समाधान निकाला जाता है, यदि वाकई सोनिया गांधी लालू यादव को विधान सभा भंग करने पर सहमत कर लेती हैं, तो क्या इस विवाद का समाधान निकल जायेगा, या उसके बाद नीतीश कुमार एक पिटारा लेकर सामने आयेंगे और उनके द्वारा इंडिया गठबंधन की ओर से पीएम फेस बनाने की दूसर मांग की सामने रख दी जायेगी, और यदि इस मांग को स्वीकार कर  लिया जाता है, तो इंडिया गठबंधन के दूसरे घटकों के बीच इसका क्या संदेश जायेगा,क्या ममता बनर्जी से अरविन्द केजरीवाल को यह महसूस नहीं होगा कि इंडिया गठबंधन एक व्यक्ति की सियासी महत्वकांक्षाओं के नतमस्तक हो गया. हालांकि इस बीच खबर यह भी है कि भाजपा जदयू सहित राजद के द्वारा भी अपने अपने विधायकों की बैठक बुलाई गयी है. हालांकि भाजपा की यह बैठक पूर्व से ही निर्धारित थी, लेकिन अब बैठक को वर्तमान पॉलिटिकल संदर्भ से भी जोड़ कर देखा जा रहा है.


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