जिस पानी के बलबूते बाबाधाम के बाशिंदें टिके हैं, वो नदी खुद ही प्यासी है, अब इंद्रदेव का ही सहारा बचा है. पढिए रिपोर्ट

    जिस पानी के बलबूते बाबाधाम के बाशिंदें टिके हैं, वो नदी खुद ही प्यासी है, अब इंद्रदेव का ही सहारा बचा है. पढिए रिपोर्ट

    देवघर (DEOGHAR):-देवघर की लाइफ लाइन कही जाने वाली डढ़वा नदी सुख कर समतल मैदान बन गई है।देवघर-जसीडीह मुख्य सड़क के बीचों बीच गुजरने वाली इस नदी को देखकर किसी को भी तरस आ जाएगा. जो बिन पानी सून लग रही है. शहर में इस नदी के जरिए ही पानी मुहैय्या कराया जाता है, लेकिन इस तपिश भरी गर्मी में हहाकार मचा हुआ है. इस गर्मी में पानी की बैचेनी बढ़ती जा रही है.

    नदी में दरार

    एकबार किसी की भी नजरें जाएगी, तो उसके मन मे तरह-तरह के बाते घूमेगी . दरअसल,डढ़वा नदी को देखने से लगता है जैसे बिन पानी खेत मे दरार पड़ गयी हो. जबकि, इसी नदी में पानी इतना लबालब भरा रहता था कि पुराने पुल से ऊपर बहता था. लेकिन, इस साल पड़ रही गर्मी और रोहिणी नक्षत्र ने नदी को खुद ही प्यासा कर दिया है. नदी बेजान और बेजार पड़ गई है. जहां पानी के नामोनिशां तक नहीं दिखते . अब इंद्रदेव पर ही नजरे टिकी है, ताकि बारिश से डढ़वा नदी के पुराने दिन लौट आए और शहर में बसी जिंदगी एकबार फिर आबाद हो.

    पानी के लिए हाहाकार, किसान परेशान

    आग बरसाते सूरज ने तो गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. भूतल में गिरते जलस्तर से देवघर के लोगों के लिए पानी बिना जिंदगी मुश्किल हो गयी है . हालात, इतने खराब है कि चारों तरफ पानी के लिए हहाकार मचा हुआ है. निगम की ओर से बमुश्किल निगम की तरफ से पेयजलआपूर्ति हो रही है. दूर-दराज इलाकों में टेंकर के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है । मॉनसून की दस्तक नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. सिंचाई नहीं होने से फसल सूख गए हैं और जैसे-तैसे ही उनके खेतों में पटवन हो रही है. किसान कुआं से पंप के जरिए पानी की जुगाड़ कर रहें हैं.  

    रिपोर्ट- रितुराज सिन्हा


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