2024 का जंग: बंद कमरे में रामटहल चौधरी और नीतीश मुलाकात! रांची पर जदयू की नजर, देखिये, किसका खेल बिगाड़ने आ रहे हैं जयराम

    2024 का जंग: बंद कमरे में रामटहल चौधरी और नीतीश मुलाकात! रांची पर जदयू की नजर, देखिये, किसका खेल बिगाड़ने आ रहे हैं जयराम

     

    Ranchi- एक तरफ रांची संसदीय सीट से कांग्रेस के पुराने पहलवान सुबोधकांत सहाय चौका लगाने की तैयारी में हैं, तो सियासी अखाड़े में सुबोधकांत को अब तक पांच बार पटकनी दे चुकें भाजपा के पुराने, कद्दावर और वयोवृद्ध नेता राम टहल चौधरी भी इस उम्र में भी छक्का लगाने को कमर कसते नजर आ रहे हैं.

    हालांकि रामटहल चौधरी अभी जंगे-ए-मैदान में उतरने के एलान करने से बचते नजर आ रहे हैं, लेकिन इस बात की तस्दीक जरुर कर रहे हैं कि बिहार के सीएम और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार से इस बाबत उनकी मुलाकात हुई है, और यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो वह एक बार फिर से रांची की जनता का सेवा करने से पीछे नहीं रहेंगे.

    दरअसल उनका इशारा इंडिया गठबंधन को लेकर है. उनका मानना है कि अभी तक इंडिया गठबंधन के अन्दर सीटों का बंटवारा नहीं हुआ है. लेकिन यदि गठबंधन के अन्दर यह सीट जदयू के खाते में आती है, जिसका उन्हे भरोसा दिलाया जा रहा है तो वह एक बार फिर से जंगे- मैदान में उतरने से पहरेज नहीं करेंगे. और उसके बाद भाजपा को हमारी कीमत पर पत्ता चल जायेगा, उनकी बातों से उनके अंदर का दर्द भी बाहर आता दिखता है.

    पार्टी ने हमारी सेवा को किया किनारा

    वह साफ शब्दों में कहते हैं कि जिस समर्पण के साथ हमने पार्टी का सेवा किया, जब यहां कोई भाजपा का झंडा ढोने वाला नहीं था, तब हमने पार्टी को सींचा, अपना खून-पसीना बहाया, लेकिन पार्टी ने उसका सिला नहीं दिया, हम जैसे पिछड़े समाज से आने वाले कार्यकर्ता को पीछे कर बाहरी लोगों पर विश्वास जताया, हालांकि तब मोदी के पिछड़ा कार्ड में हमारे कार्यकर्ता और समर्थक गुमराह हो गयें, लेकिन इन पांच वर्षों में उन्हे इस बात का विश्वास हो गया कि यह रामटहल चौधरी ही है जो उनकी आवाज बन सकता है, नहीं तो यह सियासत है, यहां पहुंच और परैवी से कई ऐसे लोगों को भी टिकट मिल जाता है, जिनकी अपनी कोई जमीन नहीं होती. उनका साफ इशारा वर्तमान भाजपा सांसद संजय सेठ की तरफ था.   

    संजय सेठ के मुकाबले मैदान में नहीं टिक पाये थें सुबोधकांत सहाय

    ध्यान रहे कि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रामटहल चौधरी के बजाय संजय सेठ को अपना उम्मीदवार बनाया था, जिसके बाद रामटहल चौधरी निर्दलीय प्रत्याशी के बतौर मैदान में उतर गये थें, हालांकि उन्हे जनसमर्थन नहीं मिला और संजय सेठ बहुत आसानी से तात्कालीन कांग्रेस उम्मीवार सुबोध कांत सहाय को पटकनी देने में कामयाब रहें, लेकिन अब बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में रामटहल चौधरी उसी भाजपा के खिलाफ जदयू के तीर के भरोसे मैदान में उतरने का मन बना रहे हैं.

    रांची संसदीय सीट पर जयराम महतो की भी है नजर

    इस बीच खबर यह भी है कि रांची संसदीय सीट पर जयराम महतो की भी नजर लगी हुई है, और जयराम यहां से अपना उम्मीवार उतार कर इस बार चुनाव को संघर्षपूर्ण बना सकते हैं. हालांकि वह पहलवान कौन होगा, अभी इस पर चुप्पी साध ली गयी है, लेकिन माना जाता है कि यह सब कुछ दिवाली के पहले तक साफ हो जायेगा.


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