मणिपुर हिंसा को लेकर विरोध तेज, जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी रांची तक निकाला जायेगा विरोध मार्च

    मणिपुर हिंसा को लेकर विरोध तेज, जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी रांची तक निकाला जायेगा विरोध मार्च

    Ranchi-मणिपुर हिंसा को लेकर झारखंड में राजनीति अब गरम होती नजर आ रही है, विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया के सहयोगी दलों की ओर से एक अगस्त को जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी रांची तक विरोध प्रर्दशन करने का निर्णय लिया गया है. विरोध प्रर्दशन के दौरान इंडिया घटक दलों की ओर से राजभवन और राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपेगा.

    इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से मणिपुर जल रहा है, बावजूद प्रधानमंत्री मोदी चुप है, राजेश ठाकुर ने कहा कि जब इस सवाल को लेकर जब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा संसद में सवाल उठाया जाता हो उनका माईक बंद कर दिया जाता है. विपक्ष की मांग 267 से तहत चर्चा चाहता है, लेकिन भाजपा किसी भी कीमत पर चर्चा को तैयार नहीं है, इस अवसर पर कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने मणिपुर में भाजपा पर दो समुदायों का लड़वाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मणिपुर की हिंसा को गुनाहगार और कोई नहीं बल्कि मणिपुर और केन्द्र की सरकार है, इनके निकम्मेपन की सजा वहां की बेकसुर जनता को भुगतनी पड़ रही है, इन नस्लीय हिंसा के तीन  माह पूरे हो गयें, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को हिंसा पीड़ित परिवारों के लिए दो सांत्वना के शब्द बोलने की फूर्सत नहीं है. जबकि जदयू प्रदेश अध्यक्ष खीरु महतो के द्वारा मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गयी. उन्होंने कहा कि मणिपुर हिंसा का अब एक ही समाधान है, वहां राष्ट्रपति शासन लगा कर सक्षम पदाधिकारियों को वहां नियुक्त किया जाय. 

    बैठक में इनकी रही उपस्थिति

    इस बैठक में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की, शहजादा अनवर, झामुमो विजय हांसदा, जदयू की ओर से खीरु महतो, फागू बेसरा के साथ  विनोद पाण्डेय , राजेश यादव, रंजन कुमार, प्रफुल्ल लिण्डा, सुखनाथ लोहरा, सीपीआई से धर्मवीर सिंह आदि शामिल रहें.


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