अब झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे सीएम हेमंत! देखिये कैसे हाईकोर्ट के फैसले के बाद खुला है सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प

    अब झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे सीएम हेमंत! देखिये कैसे हाईकोर्ट के फैसले के बाद खुला है सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प

    रांची(RANCHI): कथित जमीन घोटाला मामले में ईडी के समन के खिलाफ सीए हेमंत की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी की खंडपीठ ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर करने का निर्देश दिया. जिसके बाद सीएम हेमंत ने अपनी याचिका को वापस ले लिया. हालांकि खबर लिखे जाने तक हाईकोर्ट में याचिका लगाने की कोई खबर नहीं आयी है, लेकिन जिस प्रकार सीएम हेमंत के खिलाफ ईडी की तलवार लटक रही है, और बार-बार समन जारी कर पेशी का निर्देश दिया जा रहा है, उस परिस्थिति में साफ है कि जल्द ही अब हाईकोर्ट से राहत की गुहार लगायी जायेगी.

    क्योंकि जब तक हाईकोर्ट से इस मामले में कोई दिशा निर्देश नहीं आ जाता, ईडी समन दर समन जारी करती रहेगी, इस समन को ईडी की प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा भी कहा जा सकता है. ईडी को यह भली भांति पता है कि जब तक यह मामला कोर्ट में पेंडिंग है, उसके हाथ बहुत खुले नहीं है, क्योंकि कोर्ट की नजर उस पर बनी हुई है, बावजूद इसके समन जारी करना इस बात को इंगित करता है कि ईडी की मंशा इसे अखबारों की सुर्खियां बनाये रखने की है.

    एक बार फिर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं सीएम हेमंत

    यहां ध्यान रहे कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीएम हेमंत एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती देना उनका कानूनी और संविधानिक अधिकार है, और इस प्रकार यह मामला अभी काफी लम्बा खिंच सकता है. और शायद सीएम हेमंत की यह रणनीति भी है, क्योंकि जैसे ही लोकसभा के चुनावों का एलान होता है, माना जाता है कि केन्द्रीय एंजेंसियों की सक्रियता में कमी आयेगी.

    हालांकि एक खबर यह भी है कि ईडी चीफ के रुप में संजय कुमार मिश्रा की विदाई हो चुकी है और राहुल नवीन के रुप में ईडी को कार्यकारी चीफ मिल चुका है, जब तक ईडी को नया चीफ नहीं मिलता राहुल नवीन चीफ की भूमिका का निर्वाह करते रहेंगे. और ईडी की आगे की रणनीति बहुत कुछ राहुल नवील के नजरिये पर निर्भर करेगा, क्योंकि संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल को लेकर अलग अलग खेमों के अपने अपने दावे हैं, जहां सता पक्ष उनकी उपलब्धियों की लम्बी लिस्ट सामने लाता है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि संजय मिश्रा के कार्यकाल में सत्ता पक्षा के दवाब में सिर्फ और सिर्फ विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाया गया. अब नये चीफ राहुल नवीन के काम काज की दिशा क्या होगी, यह तो भविष्य बतायेगा, लेकिन मौजूदा हालत को देखते हुए ईडी की कार्यशैली में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता दिख रहा.   


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