कर्पूरी, लालू और लोहिया के जमाने में नहीं, टीका लगाकर घूमने वालों ने देश को बनाया गुलाम, जगदानंद की नसीहत पर मचा बवाल

    कर्पूरी, लालू और लोहिया के जमाने में नहीं, टीका लगाकर घूमने वालों ने देश को बनाया गुलाम, जगदानंद की नसीहत पर मचा बवाल

    Patna- कर्पूरी, लालू, लोहिया और जगदेव के जमाने में भारत गुलाम नहीं हुआ, उल्टे इस दौर में एक साजिश के तहत समाज के अंतिम पायदान पर ढकेल दिये गये वंचित तबकों की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ. सामाजिक समरसता और सौहार्द का वातावरण बना, लेकिन दुर्भाग्य यह भी रहा कि हाशिये पर खड़े लोगों की सशक्तिकरण इसी राजनीति को जंगलराज की उपाधि प्रदान की गयी. कोहराम मचाने का साजिश किया गया, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारत गुलाम तब हुआ जब देश में टीका-चंदन का दौर चला और इन्ही टीका लगाने वालों ने भारत को गुलामी की राह पर ढकेला.

    आरएसएस की नीतियां देश की एकता और अंखडता के लिए खतरनाक

    दरअसल ये शब्द प्रदेश राजद अध्यक्ष जगदानंद सिंह का है, आरएसएस भाजपा की नीतियों को इस देश की एकता के खतरनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर बनाने और मस्जिद तोड़ने से राष्ट्र का निर्माण होता, तो यह बेहद आसन काम होता, लेकिन टीका लगाने और मंदिर बनाने से राष्ट्र का निर्माण नहीं होता, राष्ट्र के प्राणवायू को उर्जा नहीं मिलती, मस्जिदों को तोड़ने को राष्ट्रभक्ति नहीं कहा जा सकता, लेकिन आज के दौर में मस्जिदों को तोड़ने को भी राष्ट्रभक्ति बतलाने की होड़ लगी है, लेकिन हमें यह  विस्मरण नहीं करना चाहिए कि आज हम जिस भारत में रह रहें हैं, इसके निर्माण में हमारे पूर्वजों ने अनगिनत आहूतियां दी है, उन्होंने अपना सर्वस्व त्याग किया है, तब हम इस मुकाम पर खड़े हुए हैं, लेकिन आज हमारे पूर्वजों का वह त्याग और तपस्या दांव पर लग चुका है, पूरे देश में हिन्दू मुसलमान के नाम पर समाज को विभाजित करने की साजिश रची जा रही है, और इस साजिश के राष्ट्र समाज सब कुछ बिखरता नजर आ रहा है.

    बेईमानी से 2020 हुई थी जीत

    भाजपा पर पूरी तरह हमलावर जगदानंद सिंह ने कहा कि 2020 के विधान सभा चुनाव में भरपूर बेईमानी के बाद भी हमारी ताकत को कम नहीं किया जा सका, यदि तब इमानदारी होती तो आज तेजस्वी सीएम होते, लेकिन हम निराश नहीं है, यह दौर भी समाप्त होगा, 2024  में भाजपा कहीं खड़ी नजर नहीं आयेगी, उसकी इस विभाजनकारी नीतियों को खात्मा हो जायेगा.

    इस अवसर पर राजद दफ्तर में लालू यादव की एक लाख जीवनी भी मंगवाई गई, जिसे राजद कार्यकर्ताओं के बीच वितरित किया जायेगा, इस जीवनी में लालू यादव के बचपन से आज तक का पूरा संघर्ष है, उनके उतार चढ़ाव का विवरण है.  


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