भगवान बिरसा तो बहाना, असली मकसद पांच राज्यों के आदिवासी मतदाताओं को रिझाना, मंच पर बाबूलाल की मौजूदगी से खड़ा हुआ सवाल

    भगवान बिरसा तो बहाना, असली मकसद पांच राज्यों के आदिवासी मतदाताओं को रिझाना, मंच पर बाबूलाल की मौजूदगी से खड़ा हुआ सवाल

    रांची -धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्म स्थली पर उलिहातू में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का मंच पर मौजूदगी से झारखंड में एक सियासी बवाल खड़ा हो गया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने बाबूलाल की मौजदूगी पर आपत्ति जताते हुए भाजपा से इस बात का जवाब मांगा है कि यह राजकीय कार्यक्रम था या  भाजपा का चुनावी कार्यक्रम, आखिर किस इस राजकीय कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी किस हैसियत के साथ पीएम मोदी के साथ मंच पर मौजूद थें, कौन सा सरकारी ओहदा उनके पास है, और यदि इस मंच पर बाबूलाल को जगह दी जा सकती है, तो इस प्रकार को झारखंड के सभी विधायकों की मौजूदगी वहां होनी चाहिए थी.

    राजेश ठाकुर ने आरोपों की बौछार करते हुए इस बात का दावा किया कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री के मंच का भगवाकरण किया गया, उससे साफ है कि यह उनका सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए उनका यह विशुद्ध चुनावी कार्यक्रम था, धरती आबा को श्रद्धाजंलि तो महज एक बहाना था,  असली निशाना तो पांच राज्यों के आदिवासी मतदाताओं पर लगी हुई थी.

    प्रधानमंत्री के इस रुप को देख कर भगवान बिरसा भी आश्यर्य में होंगे

    राजेश ठाकुर ने यह दावा किया कि आज तो भगवान बिरसा यह देख कर हैरान होंगे कि इस देश में एक ऐसा प्रधानमंत्री भी है, जो उनके नाम इस्तेमाल कर अपना चुनावी लाभ लेने की जुगत बिठा रहा है, एक तरफ बिरसा मुंडा को याद कर भावूक होने की नौटंकी की जाती है, दूसरी ओर बिरसा की राह पर चल कर जल जंगल और जमीन का लड़ाई वाले एक आदिवासी मुख्यमंत्री को जेल भेजने की साजिश की जाती है, यह दुहरा रवैया पीएम मोदी की सारी घोषणाओं को खोखला साबित कर रहा है. यदि उनके अन्दर वास्तव में आदिवासी समाज की इतनी ही पीड़ा होती तो मणिपुर में आदिवासी महिलाओं का सामूहिक बलात्कार और निवस्त्र करने की उस अमानवीय व्यवहार पर प्रधानमंत्री चुप्पी नहीं साधते, आखिर प्रधानमंत्री को किस बात का डर है कि वह मणिपुर नहीं जा रहे हैं, और तो और जिस आदिवासी बहुल राज्य मिजोरम से भी उन्होंने कन्नी काट लिया, उनकी हालत यह है कि पूरा चुनाव गुजर गया लेकिन वह मणिपुर नहीं गयें. मणिपुर की घटना ने प्रधानमंत्री के कथनी और करनी को उजागर कर दिया है, यह मुंह में राम बगल में छूरी लेकर घूमते रहते हैं.

    राजेश ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री यह भूल जाते हैं कि झारखंड की यह जनता, बिरसा के ये सपूत भाजपा नेता नरेन्द्र दास मोदी के स्वागत में नहीं खड़ा है, ये झारखंडी सूपत तो अपने देश के प्रधानमंत्री के स्वागत में खड़े हैं, लेकिन प्रधानमंत्री यहां जहां कहीं भी जाते हैं, जिस भी कार्यक्रम में शामिल होते हैं, वह  अपनी गरिमा को भूल भाजपा नेता बने रहते हैं, नहीं तो एक सरकारी कार्यक्रम में बाबूलाल की मौजदूगी नहीं होती.  

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