पेशाब कांड पर लोबिन हेम्ब्रम की गर्जना, बाबूलाल की चुप्पी खतरनाक, परवेश शुक्ला को फांसी पर चढ़ाये भाजपा

    पेशाब कांड पर लोबिन हेम्ब्रम की गर्जना, बाबूलाल की चुप्पी खतरनाक, परवेश शुक्ला को फांसी पर चढ़ाये भाजपा

    Ranchi- भाजपा कार्यकर्ता परवेश शुक्ला के द्वारा एक आदिवासी युवक पर पेशाब करने के विरोध में राजधानी रांची स्थित भाजपा कार्यालय को घेरने पहुंचे आदिवासी संगठनों को झामुमो विधायक लोबिन हेम्ब्रम का भी साथ मिला है.

    पेशाब कांड पर बाबूलाल के द्वारा भाजपा का बचाव करने पर बिफरे लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि समझ में नहीं आता कि किस प्रकार के आदिवासी नेता है बाबूलाल, एक आदिवासी के चेहरे पर भाजपा शासित राज्य में पेशाब किया जाता है, और बावजूद इससे उनका आदिवासियत नहीं जागता. इधर उधर की बात कर आरोपी के बचाव की मुद्रा में खड़े हो रहे हैं, लोबिन हेम्ब्रम बाबूलाल से सवाल पूछते हुए कहा कि झारखंड की घटनाओं हवाला देकर आप उस कृत्य को सही कैसै ठहरा रहे हैं.

    आरोपी का घर गिराना मामले का समाधान नहीं

    लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि आरोपी का घर गिराने से कुछ नहीं होने वाला है, यह सिर्फ मामले का दफन करन की साजिश है, भाजपा में हिम्मत है तो आरोपी को फांसी की सजा दिलवाये,  बीच चौराहे पर खड़ा कर उसे फांसी दी जाय, तब ही आदिवासी समाज को शांति मिलेगा और उसमें यह विश्वास जगेगा कि भाजपा आदिवासी समाज के साथ खड़ी है, नहीं तो यही माना जायेगा कि इस कुकृत्य के बाद भी भाजपा अपने कार्यकर्ता के बचाव में खड़ी है.

    मनुवादी-संघी सोच बंद करो

    ध्यान रहे कि इस कांड के विरोध में आज झारखंड के विभिन्न आदिवासी संगठनों के द्वारा भाजपा कार्यालय का घेराव किया गया था, जिसमें मनुवादी-संघी सोच बंद करो, आदिवासियों पर अत्याचार नहीं सहेगा हिन्दूस्तान, आदिवासी-मूलवासी एकता जिंदाबाद, बहुजन एकता जिंदाबाद, आदिवासी-मूलवासियों से नफरत करने वाली भाजपा होश में आओ, होश में आओ की तख्तियां हाथों में लेकर प्रदर्शनकारी अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे थें.

    हालांकि प्रशासन की ओर से प्रर्दशनकारियों पर काबू पाने के लिए काफी बड़ी संख्या में पुलिस बल को उतारा गया था, प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों से शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की जा रही थी. आज पूरे शहर की निगाह इसी ओर लगी हुई थी, लेकिन प्रशासन की सतर्कता से यह प्रर्दशन शांति पूर्ण समाप्त हो गया, लेकिन खबर यह है कि यह  विरोध प्रदर्शन अंतिम नहीं है, दावा किय जा रहा है कि अभी आदिवासी संगठनों की ओर से आगे के विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनायी जा रही है, और अभी शहर को इस तरह के कई विरोध प्रर्दशन देखने को मिल सकते हैं.


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