Jharkhand breaking- प्रधानमंत्री के काफिले को रोकने वाली महिला गिरफ्तार, पति की प्रताड़ना से मानसिक अवसाद में होने का दावा

    Jharkhand  breaking- प्रधानमंत्री के काफिले को रोकने वाली महिला गिरफ्तार, पति की प्रताड़ना से मानसिक अवसाद में होने का दावा

    Ranchi-प्रधानमंत्री के काफिले के सामने जाकर उनकी गाड़ी को रोकने का प्रयास करने वाली महिला संगीता झा को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया, प्रशासन ने उसके विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मामला भी दर्ज करवाया है. इसके साथ ही इस चुक के लिए तीन जवानों को भी निलंबित करने का आदेश दिया गया है. ध्यान रहे कि हालिया झारखंड दौरे के क्रम जब पीएम मोदी का काफिला भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान-सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय की ओर जा रहा था, आरोपी महिला संगीता झा ने काफिले को रोकने का प्रयास किया था, महिला की इस हरकत से सुरक्षाकर्मियों के बीच अफरातफरी मच गयी थी, किसी प्रकार उक्त महिला को बीच सड़क से हटाया गया और बाद में लम्बी पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया. लेकिन अब प्रशासन ने महिला के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करते हुए गिरफ्तार कर लिया है. जबकि एएसआई अबू जफर, सिपाही छोटेलाल टुडू और सिपाही रंजन कुमार को निलंबित करने का निर्णय लिया गया है.

     पति की प्रताड़ना से मानसिक अवसाद से गुजर रही है महिला

    इस बीच यह जानकारी भी सामने आयी है कि महिला मानिसक रुप से अवसाद से गुजर रही है, महिला का दावा है कि वर्ष 2012 में उसकी शादी देवघर जिले के जमुनी गांव में हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही उसका पति उसके साथ मारपीट करने लगा. जिसके बाद उसके ससुराल छोड़ने को मजबूर होना पड़ा, लेकिन उसके बाद उसके सामने जीविका की समस्या खड़ी हो गयी, पति के द्वारा भरण पोषण के लिए पैसा देने से इंकार कर दिया गया, जिसके बाद उसकी  मानिसक  स्थिति बिगड़ती चली गयी.

     राष्ट्रपति से भी मिलकर अपनी व्यथा को बताने का पहले ही कर चुकी है प्रयास

    इसी मानसिक स्थिति में महिला ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर अपनी व्यथा को बताने को निर्णय लिया. और वह दिल्ली के लिए निकल पड़ी, वह करीबन 10 दिनों तक प्रधानमंत्री से मिलने का प्रयास करती रही, लेकिन कामयाबी नहीं मिली, उसके बाद उसने राष्ट्रपति से मिलकर अपनी व्यथा को बताने की कोशिश की , लेकिन वहां भी सुरक्षाकर्मियों के द्वारा भगा दिया गया, जिसके बाद वह थक हार कर रांची लौट आयी. लेकिन इस बीच उसे इस बात की खबर मिली की प्रधानमंत्री खुद रांची आ रहे हैं, तो उसके अन्दर एकबारगी आशा का संचार हुआ, और प्रधानमंत्री  के काफिले को रोककर अपनी व्यथा को बताने का निर्णय लिया, लेकिन अपनी मानसिक व्यथा और प्रताड़ना में वह यह भूल गयी कि प्रधानमंत्री का अपना प्रोटोकॉल होता है, और  आम लोगों के  लिए  उनसे मिलना दुष्कर कार्य है, अब देखना होगा कि महिला की समस्याओं का समाधान होता है या प्रधानमंत्री की सुरक्षा को धत्ता बताने के आरोप में उसे सलाखों के अंदर रात बितानी पड़ती है. 


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