अंदर पगड़ीधारी सम्राट और बाहर ऑपरेशन चिराग! मोदी के चक्रव्यूह में सीएम नीतीश!  सियासी सफर पर विराम या बिहार को एक पलटी का इंतजार

    अंदर पगड़ीधारी सम्राट और बाहर ऑपरेशन चिराग! मोदी के चक्रव्यूह में सीएम नीतीश!  सियासी सफर पर विराम या बिहार को एक पलटी का इंतजार

    Patna-पटना की सड़कों पर आज गजब की बेचैनी है, सियासी कोहराम का नजारा है, एक तरफ विधान सभा के अंदर सीएम नीतीश के सेक्स ज्ञान को आधार बना कर कल तक उनसे सियासत की दुनिया को छोड़ कर अयोध्या शिफ्ट करने की सलाह देने वाले भाजपा कार्यकर्ता है. भाजपा विधायक निवेदिता सिंह के समर्थक है, यह वही भाजपा की निवेदिता, जिसने सीएम नीतीश के इस सेक्स ज्ञान के बाद विधान सभा के बाहर निकल बिलख बिलख कर इस सेक्स ज्ञान को महिला अस्मिता पर प्रहार बताया था, इसके साथ ही अपनी हिलती पगड़ी को बार-बार टाईट कर सीएम नीतीश को बिहार का भार बताने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी के समर्थकों की टोली भी मौजदू है. पूरे बिहार के हर गली चौराहे पर आज सम्राट चौधरी का वह सौगंध चर्चाओँ के केन्द्र में है. लोग-बाग का यह सवाल उठा रहें कि सीएम नीतीश को उखाड़ फेंकने के बजाय भाजपा का यह सम्राट तो अपनी पगड़ी ही पलटू राम के चरणों में भेंट कर गया, और इन समर्थकों में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा की टोली भी है, यह वही विजय सिन्हा भी है, जिन्हे विधान सभा अध्यक्ष के पद पर आसीन रहते हुए तात्कालीन सीएम नीतीश कुमार ने फटकार लगायी थी, और तब नीतीश का यह रौद्र रुप अखबारों में पहले पन्ने की सुर्खियां बनी थी. शायद भारत के इतिहास में किसी विधान सभा अध्यक्ष एक सीएम के द्वारा पहली बार इस तरह अपमानित होने को विवश होना पड़ा था. एक तरफ सीएम नीतीश वार पर वार किये जा रहे थें, दूसरी तरह विधान सभा अध्यक्ष इस रौद्र रुप को देखकर किंकर्तव्यविमूढ़ स्थिति में अपनी पार्टी के विधायकों की ओर देख रहे थें, लेकिन कहीं से ही उनके सम्मान की रक्षा के लिए एक स्वर नहीं निकला.

    सम्राट चौधरी की पगड़ी सीएम नीतीश को उनकी सियासी औकात बताता रहेगा

    लोग हैरत में इसलिए भी है कि कभी नीतीश को उखाड़ फेंकने का दहाड़ लगाने वाले आज ये दोनों सीएम नीतीश के डिप्टी होंगे. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इस पलटी के बाद सीएम नीतीश सियासी तूफान से बाहर निकल चुके हैं, या इस पलटी के साथ ही वह अपने सियासी कैरियर को दांव पर लगा चुके हैं. क्या जिस पाला बदल को सीएम नीतीश के सफलतम कूटनीति का उदाहरण बताया जा रहा है, यही कूटनीति उनके सियासी भविष्य पर पूर्णविराम लगाने जा रहा हैं. क्या बिहार का यह चाणक्य पीएम मोदी के पंजे में सिमट चुका है, और अब वह जब चाहे इनको सियासी बियावान में फेंक सकते हैं. नीतीश की सत्ता अब कितनी दिन चलेगी, अब यह तय खुद नीतीश नहीं कर पीएम मोदी के मुट्ठी में होगी.

    जश्न के पहले हो सकती है बत्ती गूल

    यहां याद रहे कि यदि सम्राट चौधरी अपनी पगड़ी के साथ एक डिप्टी सीएम के रुप में नीतीश को हर वक्त उनके अवसान का संदेश देते रहेंगे, तो दूसरी ओर 2024 में एक ऑपेरशन चिराग भी उनका इंतजार करता नजर आ रहा है, चिराग पासवान ने अभी से ही साफ कर दिया है कि यदि परिस्थितियां बदली तो वह जदयू खाते सहित कूल  23 लोकसभा की सीटों पर अपना सियासी  पहलवान उतार सकते हैं, साफ है कि नीतीश की मुश्किल बढ़ने वाली है,  अंदर सम्राट और बाहर ऑपेरशन चिराग उनका इंतजार कर रहा है, और यह सब कुछ पीएम मोदी की स्वीकृति के तहत ही हो रहा है, इस हालत  में यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार इस पलटी का जश्न कब तक मना पाते हैं, और कहीं जश्न के पहले ही बत्ती गूल की स्थिति नहीं आ जाय.

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