तू इधर उधर की बात न कर, ये तो बता मणिपुर क्यों दहला? कुछ इसी अंदाज में दीपिका पांडेय सिंह के निशाने पर रहें पीएम मोदी

    तू इधर उधर की बात न कर, ये तो बता मणिपुर क्यों दहला? कुछ इसी अंदाज में दीपिका पांडेय सिंह के निशाने पर रहें पीएम मोदी

    Ranchi- जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था, उसकी सुरों का आनन्द ले रहा था, कुछ यही हालत हमारे देश के प्रधनामंत्री की है, पिछले तीन महीनों से मणिपुर में आग लगी हुई है, इस आग में सब कुछ स्वाहा हो रहा है, हमारी सामाजिक सद्भावना, संवैधानिक मूल्य और हमारा लोकतंत्र धूं धू कर जल रहा है, उस आग की लपटें हमारी आत्मा को कचोट रही है, लेकिन इस तीन महीनों में हमारे प्रधानमंत्री को मणिपुर के हालात पर दो शब्द बोलने की हिम्मत नहीं हुई, वह विदेशों में अपने तथाकथित डंके की शोर बजाते रहें.

    ये शब्द हैं कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह के, दीपिका पांडेय ने कहा है कि हमारे प्रधानमंत्री जब विदेश जाते हैं, तो बड़ी-बड़ी बात करते हैं, भारत के विविधतापूर्ण लोकतंत्र के दावे करते हैं, उसकी उपलब्धियां गिनाते हैं, लेकिन पिछले तीन महीने से जातीय हिंसा की आग में जलते मणिपर के लिए उनके पास तीन शब्द नहीं था. यही सच्चाई है.

    सर्वोच्च न्यायालय की फटकार के बाद जागी सरकार

    जब इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय उनकी फटकार लगाता है. इस बात की हिदायत देता है कि यदि आपने इस पर रोक नहीं लगायी तो हमें ही कुछ करना होगा, तब प्रधानमंत्री को मणिपुर के हालत पर रोना आता है,  लेकिन इसके साथ ही वह उस हालात की तुलना राजस्थान और छतीसगढ़, दिल्ली जैसे राज्यों में होने वाले छिटपुट घटनाओं से कर अपनी सोच का परिचय दे जाते हैं. वह अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर, उसका राजनीतिकरण करने की साजिश रचने लगते हैं.

    इस त्रासदी पर राजनीति के बजाय शांति की पहल करें प्रधानमंत्री

    दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस त्रासदी पर राजनीति करने के बजाय तत्काल शांति की अपील करनी चाहिए थी, वहां की यात्रा करनी चाहिए थी, लोगों के दिलों में मरहम लगाना चाहिए था, लेकिन एक प्रधानमंत्री के रुप में उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, हमें गर्व है राहुल गांधी पर जिन्होंने मणिपुर का दौरा करने की हिम्मत दिखलायी, और उस वक्त भी उन्होंने यही कहा कि मणिपुर के हालत बेहद खराब है, शासन प्रशासन पर लोगों की आस्था डिग चुकी है, यह वक्त राजनीति का नहीं, मणिपुर को बचाने का है, इस नफरत के शहर में मुहब्बत की दुकान खोलने की है, लेकिन भाजपा ना तो खुद करने की स्थिति  में थी और ना ही किसी को कुछ करने देना चाहती थी, यही कारण है कि उनकी यात्रा का विरोध किया गया, लेकिन आज सच्चाई सबके सामने आ गयी कि कौन गलत था और कौन सही.


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