टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज के दौर में ऐसी ऐसी घटनाएँ सामने आती है जिसको सुनकर आश्चर्य तो होता ही है लेकिन साथ साथ मन में कई सवाल पैदा होने लगते है. अक्सर कई प्रवासी बस इसलिए अमेरिका में वीजा लगाते है क्योंकि उन्हें नारिकता चाहिए होती है. इसी को लेकर अमेरिका से ऐसा ही मामला सामने आया है. अमेरिका में अवैध प्रवासियों और वीजा नियमों के दुरुपयोग के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का एक्शन लगातार तेज होता जा रहा है. इसी कड़ी में अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) ने 'बर्थ टूरिज्म' (Birth Tourism) पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. अमेरिकी प्रशासन ने संगठित नेटवर्कों और धोखे से वीजा हासिल करने वालों के खिलाफ हंटर चलाते हुए 600 से अधिक विदेशी नागरिकों के वीजा तत्काल प्रभाव से रद्द (Revoke) कर दिए हैं. इस वैश्विक कार्रवाई के बाद यूरोप से लेकर अफ्रीका और एशिया तक हड़कंप मच गया है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर बयान जारी कर स्पष्ट कहा, "अमेरिकी वीजा एक विशेषाधिकार है, कोई अधिकार नहीं. हम इस तरह के दुरुपयोग को रोकने, बर्थ टूरिज्म नेटवर्क को ध्वस्त करने और हमारे सिस्टम को धोखा देने वालों को जवाबदेह बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं."
Under President Trump, the State Department is defending the integrity of U.S. citizenship by ending illegal birth tourism schemes.
— Department of State (@StateDept) June 10, 2026
No foreigner is permitted to obtain a visitor visa for the primary purpose of acquiring U.S. citizenship for a child by giving birth in the U.S.
क्या है 'बर्थ टूरिज्म' जिसपर हुआ है यह एक्शन?
'बर्थ टूरिज्म' उस प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें विदेशी गर्भवती महिलाएं टूरिस्ट वीजा (B-1/B-2) पर अमेरिका की यात्रा करती हैं. इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी धरती पर बच्चे को जन्म देना होता है. दरअसल, अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के तहत वहां पैदा होने वाले किसी भी बच्चे को जन्म से ही अमेरिकी नागरिकता (Birthright Citizenship) मिल जाती है.
कई विदेशी नागरिक इस नियम का फायदा उठाकर अपने बच्चों के लिए अमेरिकी पासपोर्ट हासिल करते हैं, जिसे रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने यह कड़ा रुख अपनाया है.
वैश्विक स्तर पर कहां-कहां हुई कार्रवाई
अमेरिकी जांचकर्ताओं ने यूरोप में साल 2024 से चल रहे 400 से अधिक संदिग्ध मामलों की पहचान की है. यहाँ कम से कम 6 ऐसी कंपनियां सक्रिय थीं, जो महिलाओं को वीजा इंटरव्यू पास करने की ट्रेनिंग देती थीं और अमेरिका में ठहरने व डिलिवरी का इंतजाम कराती थीं. पश्चिम और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्रों में 200 से अधिक वीजा रद्द किए गए हैं. जांच में सामने आया कि 'वीजा फिक्सर्स' और फर्जी दस्तावेजों के जरिए गर्भवती महिलाओं को अवैध रूप से अमेरिका भेजा जा रहा था.
भारत से क्या है कनेक्शन और भारतीयों पर क्या होगा असर?
भले ही इस विशेष 600 वीजा कैंसिलेशन की सूची में मुख्य रूप से यूरोप और अफ्रीका के संगठित गिरोह शामिल हैं, लेकिन इस कार्रवाई का और ट्रंप की पूरी इमिग्रेशन पॉलिसी का भारत पर बहुत व्यापक और गंभीर असर पड़ने वाला है. 
H-1B, L-1 और F-1 वीजा धारकों के लिए बड़ी चुनौती
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही 'बर्थराइट सिटिजनशिप' (जन्मजात नागरिकता) को सीमित करने वाले कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत, यदि माता-पिता दोनों अस्थाई वीजा (जैसे H-1B वर्क वीजा, L-1 इंट्रा-कंपनी ट्रांसफर या F-1 स्टूडेंट वीजा) पर अमेरिका में हैं, तो उनके वहां पैदा होने वाले बच्चे को अब सीधे तौर पर अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी. इसका सबसे बड़ा झटका अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को लगेगा, जो सालों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं.
भारतीय महिलाओं के लिए 'मेडिकल वीजा' की जांच होगी सख्त
यदि कोई भारतीय महिला गर्भावस्था के दौरान अमेरिका की यात्रा करना चाहती है, तो अमेरिकी दूतावास (Consulates) में उसकी कड़ाई से स्क्रूटनी की जाएगी. आवेदकों को यह साबित करना होगा कि यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य बच्चे को जन्म देना नहीं है. यदि यात्रा किसी आवश्यक मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए है, तो इलाज, hospital और ठहरने के खर्च का पूरा एडवांस वित्तीय विवरण (Financial Proof) देना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर वित्तीय बोझ नहीं बनेंगी.
'एंकर बेबी' शॉर्टकट हमेशा के लिए बंद
भारत और अन्य देशों में कई लोग इस योजना के साथ भी 'बर्थ टूरिज्म' का सहारा लेते थे कि अमेरिका में पैदा हुआ बच्चा जब 21 साल का हो जाएगा, तो वह अपने माता-पिता को 'फैमिली स्पॉन्सरशिप' के जरिए अमेरिका की स्थायी नागरिकता (ग्रीन कार्ड) दिला सकेगा. अमेरिकी राजनीति में इसे 'एंकर बेबी' (Anchor Baby) कहा जाता है.
ट्रंप के इस ताजा प्रहार के बाद भविष्य में भारतीयों के लिए यह शॉर्टकट पूरी तरह बंद होने जा रहा है.

