सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा, सालों से चल रहा था ये खेल, जानिए कैसे खुलासा हुआ

    सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा, सालों से चल रहा था ये खेल, जानिए कैसे खुलासा हुआ

    टीएनपी डेस्क (Tnp desk):-सरकारी नौकरी पाने की हसरत आज भी कई लोगों के दिलों में है. इसे लेकर समय-समय पर आवेदन आते रहते हैं. लेकिन, कई लोग ऐसे हैं, जो शार्ट कर्ट के चक्कर में अपना समय और पैसा दोनों बर्बाद कर देते हैं. इसके साथ ही उस झंझट में पड़ जाते हैं. जिससे निकलने में पसीने छूट जाते हैं.

    फर्जी नौकरी देने का खुलासा

    ऐसा ही एक फर्जीवाड़ी या फिर कहे सरकारी नौकरी देने के नाम पर भोलेभाले युवकों के साथ खेल खेला गया. इस फैक जॉब रैकेट का खुलासा सीबीआई ने किया औऱ तीन जालसाजों की गिरफ्तारी की. जांच ऐजेंसी ने बताया कि ये सिंडिकेट देश के कई शहरों में दो साल से काम कर रहा था. जो सरकारी नौकरी का झांसे देकर करोड़ों रुपए कमाए. इतना ही नहीं इस सिंडिकेट ने फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर 25 युवाओं को ट्रेनिंग भी दे रहे थे.  

    कई जगहों पर छापेमारी

    सीबीआई ने इस सिलसिले में शुक्रवार को धनबाद, पटना, अररिया, मुंबई, मंगलुरु और बेंगलुरु में नौ ठिकानों पर छापेमारी की. कोयलानगरी धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र के भुईफोड़ मंदिर के पास गिरोह के अमन कुमार के घर भी छापेमारी की गई. जहां से  कई दस्तावेज जब्त किए गए. छह  आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया. इस दौरान जांच एजेंसी ने धनबाद से अमन कुमार, बेंगलुरू से अजय कुमार और अररिया से अभिषेक सिंह उर्फ विशाल को गिरफ्तार किया.

    रेलवे और एफसीआई में नौकरी

    जांच एजेंसी की पूछताछ में ये पता चला कि ये लोग एफसीआई और रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से 10-12 लाख रुपए की वसूली करते थे. ये पैसे प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपोजिट के नाम पर लिए जाते थे. इस फर्जीवाड़े के खिलाफ महाराष्ट्र के नासिक निवासी अजय पानदुरांग पाटिल ने मुंबई सीबीआई से शिकायत की थी. जिसके बाद जांच एजेंसी ने दो नवंबर को  अजय कुमार, बीराबा पाटिल, रूपेश, अभिषेक, दीपक और संध्या आदि के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की थी



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