टीनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया है जिसके तहत व्यावसायिक बकरी पालन को प्रोत्साहित करने का बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत संचालित "व्यावसायिक बकरा-बकरी पालन योजना" को मंजूरी दे दी है. इस योजना के अंतर्गत लाभुकों को बकरी फार्म स्थापित करने के लिए 70 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी.

राज्य सरकार पहले भी किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला चुकी है. 370 करोड़ रुपये की जैविक प्रमाणीकरण योजना के बाद अब यह नई योजना ग्रामीण युवाओं और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इस योजना के लिए राज्य सरकार ने 30 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है. 27 मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी. इससे पहले योजना को विकास परिषद से भी मंजूरी मिल चुकी थी. सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाएं और अपनी आय बढ़ाएं.
क्या है व्यावसायिक बकरा-बकरी पालन योजना?
इस योजना के तहत 100 बकरियों और 5 बकरों की क्षमता वाला व्यावसायिक बकरी फार्म स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी. एक फार्म की कुल लागत लगभग 9.78 लाख रुपये निर्धारित की गई है. इस लागत पर सरकार करीब 70 प्रतिशत यानी लगभग 6.84 लाख रुपये का अनुदान देगी. शेष राशि लाभुक के अंशदान और बैंक ऋण के माध्यम से पूरी की जाएगी.
सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी दो चरणों में जारी की जाएगी. पहली किस्त में कुल अनुदान राशि का 40 प्रतिशत और दूसरी किस्त में 60 प्रतिशत राशि दी जाएगी. इससे लाभुकों को परियोजना शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने में सहायता मिलेगी.
437 लाभुकों का होगा चयन
योजना के तहत पूरे राज्य में कुल 437 लाभुकों का चयन किया जाएगा. इनमें सामान्य वर्ग के 219 लाभार्थी शामिल होंगे. इसके अलावा अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 29 लाभुकों तथा जनजातीय क्षेत्र उपयोजना के तहत 189 लाभुकों का चयन किया जाएगा.

सरकार ने योजना को सामाजिक रूप से समावेशी बनाने पर विशेष ध्यान दिया है ताकि समाज के सभी वर्गों को इसका लाभ मिल सके. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
स्वयं सहायता समूह और एफपीओ भी कर सकेंगे आवेदन
इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत पशुपालकों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी इसके लिए आवेदन कर सकेंगे. बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी. इससे प्रशिक्षित और गंभीर उद्यमियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करने पर यह एक लाभदायक व्यवसाय बन सकता है. बकरी के मांस और अन्य उत्पादों की लगातार बढ़ती मांग के कारण यह क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है.
क्या हैं पात्रता की शर्तें?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का झारखंड का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है. साथ ही उसे बकरी पालन का पूर्व अनुभव होना चाहिए. आवेदक के पास कम से कम आधा एकड़ भूमि होनी चाहिए, जो स्वयं की हो या कम से कम 10 वर्षों की लीज पर ली गई हो.

इसके अलावा आवेदक को बैंक द्वारा जारी प्रमाण-पत्र या पिछले एक वर्ष का औसत बैंक बैलेंस प्रस्तुत करना होगा. चयनित लाभुक को यह शपथ-पत्र भी देना होगा कि वह कम से कम 10 वर्षों तक इस परियोजना का संचालन करेगा.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
राज्य सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण युवाओं, किसानों और पशुपालकों के लिए रोजगार का एक मजबूत माध्यम बन सकती है. 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी व्यावसायिक स्तर पर बकरी पालन शुरू कर सकेंगे. यदि योजना का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन किया गया, तो यह न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाएगी बल्कि झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी.

