ढुल्लू महतो Vs संजीव सिंह: "पावर" की लड़ाई रेल से शिलापट्ट पर आई, किसका नुकसान किसका फ़ायदा?

    ढुल्लू महतो Vs संजीव सिंह: "पावर" की लड़ाई रेल से शिलापट्ट पर आई, किसका नुकसान किसका फ़ायदा?

    धनबाद (DHANBAD): कोयलांचल में "पावर" और "विवाद" के बीच जन्म और मरण का नाता है. यह रिश्ता कोई आज का नहीं है, बल्कि पहले से चला आ रहा है. दरअसल, जब किसी का "पावर" बढ़ता है तो वह "विवाद" को जन्म देता है. ऐसा पहले भी होता था और आज भी हो रहा है. पहले लोग सीधे-सीधे टकराते थे, लेकिन अब महीन राजनीति हो रही है. दरअसल, यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि 6 अप्रैल को धनबाद- मुंबई ट्रेन के उद्घाटन से शुरू हुआ विवाद, अब शिलापट्ट  पर आ गया है. 6 अप्रैल का विवाद तो धनबाद से लेकर रांची और रांची से लेकर दिल्ली तक पहुंच गया है. रेल मंत्री के पास शिकायतों का पुलिंदा भेजा जा रहा है. 

    क्यों अभी भी पसोपेश में है धनबाद के रेल अधिकारी

    रेल अधिकारी पसोपेश  में हैं. 6 अप्रैल को धनबाद के नवनिर्वाचित मेयर संजीव सिंह को पहले उद्घाटन समारोह के लिए निमंत्रण दिया जाता है और फिर कार्यक्रम से पहले आने से मना कर दिया जाता है. यह विवाद ने तूल पकड़ लिया है. रेलवे अधिकारी संजीव सिंह के आवास जाकर उनसे और उनकी विधायक पत्नी रागिनी सिंह से मुलाकात की और आगे ऐसा नहीं करने का वचन दिया. आरोप लगा कि सांसद ढुल्लू महतो के दबाव में रेल अधिकारियों ने ऐसा किया. हालांकि सांसद ढुल्लू महतो इसे ख़ारिज कर चुके हैं. अब इसके बाद शिलापट्ट का विवाद छिड़ गया है.  

    सिंदरी के मामले को लेकर माले हुई गंभीर

    दरअसल, निगम जो भी विकास कार्य का शिलान्यास कर रहा है, उसके शिलापट्ट में सांसद और विधायक का नाम नहीं दिया जा रहा है. इससे एक नया विवाद जन्म ले लिया है. जानकारीके अनुसार कतरास के वार्ड नंबर 1 में 5-6  दिन पहले एक शिलान्यास कार्यक्रम हुआ. उसके शिलापट्ट में विधायक और सांसद का नाम नहीं था. कतरास इलाका गिरिडीह संसदीय क्षेत्र में आता है. ऐसे में वहां सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी का नाम और विधायक शत्रुघ्न महतो का नाम होना चाहिए था, लेकिन नहीं दिया गया. इसके बाद 15 अप्रैल को सिंदरी इलाके में शिलान्यास हुआ, लेकिन वहां भी स्थानीय विधायक और सांसद  का शिलापट्ट में नाम नहीं दिया गया. यह विवाद अब आगे बढ़ता जा रहा है. 

    बता दें कि सिंदरी से माले के विधायक चंद्रदेव महतो चुनाव जीते हैं, तो सिंदरी धनबाद संसदीय क्षेत्र में आता है. ऐसे में वहां के सांसद ढुल्लू महतो हुए. लेकिन ना विधायक का नाम शिलापट्ट पर है और नहीं सांसद का. इस मामले को माले ने गंभीरता से लिया है. माले के नगर सचिव राजीव मुखर्जी ने नगर आयुक्त को पत्र देकर कहा है कि 15. 4.26 को सिंदरी में हुए शिलान्यास के शिलापट्ट पर सिंदरी विधायक का नाम नहीं दिया गया है और न हीं उन्हें आमंत्रित किया गया था. इस पर पार्टी की कड़ी आपत्ति है. आग्रह किया गया है कि एक सप्ताह के भीतर शिलापट्ट  को हटाकर नए सिरे से शिलान्यास कराया जाए अन्यथा माले अपने स्तर से शिलापट्ट  को हटाने का काम करेगी. 

    धनबाद में "पावर" के साथ ही विवाद का नए ढंग से हुआ जन्म
     
    दरअसल, धनबाद में "पावर" के साथ ही विवाद का जन्म भी होता है. धनबाद को उसका वाजिब हक नहीं मिलने की एक बहुत बड़ी वजह जनप्रतिनिधियों में आपसी सामंजस्य का नहीं होना भी बताया जाता है. झारखंड गठन के साथ ही प्रदेश के नगर विकास मंत्री बच्चा बाबू बने थे. उम्मीद बढ़ी थी कि धनबाद का विकास होगा लेकिन बहुत कुछ नहीं हुआ. यहां के जनप्रतिनिधि धनबाद तो आगे बढ़ाने के बजाय अपने "पावर" के प्रदर्शन पर ज्यादा भरोसा करते  हैं. यह सभी दलों प्रतिनिधियों के साथ है. निरसा के पूर्व विधायक स्वर्गीय गुरुदास  चटर्जी कहा करते थे कि अगर किसी जिले के छह विधायक और दो सांसद मुख्यमंत्री के पास जाकर बैठ जाए, तो कोई काम नहीं हो, ऐसा हो नहीं सकता. अब पावर के साथ विवाद की लड़ाई नए सिरे से शुरू हो गई है. इस लड़ाई में नुकसान धनबाद का ही होगा. 



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