राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में बढ़ी सरगर्मी, जीत की ओर भाजपा की कवायद तेज़, इन नामों की चर्चा जोरों पर

    राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में बढ़ी सरगर्मी, जीत की ओर भाजपा की कवायद तेज़, इन नामों की चर्चा जोरों पर

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. खासकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर हलचल तेज हो गई है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और लंबे समय से संगठन से जुड़े कार्यकर्ता राज्यसभा सीट के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं. ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे उम्मीदवार के चयन की है, जो संगठन और राजनीतिक समीकरण दोनों पर पूरी तरह फिट बैठ सके.

    सूत्रों के अनुसार, मौजूदा राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश एक बार फिर पार्टी से टिकट पाने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और रघुवर दास के नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इन नेताओं की सक्रियता ने पार्टी के भीतर राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है. इसके अलावा हाल ही में झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं सीता सोरेन भी राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर कर चुकी हैं. माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व सभी दावेदारों के राजनीतिक अनुभव, संगठन में योगदान और वर्तमान समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला करेगा. बताते चलें कि सीता सोरेन राज्य में हुए विधानसभा चुनावों से पहले ही जेएमएम छोड़ भाजपा में शामिल हुई हैं. वह दिवंगत गुरु शिबू सोरेन की बड़ी बहु हैं और काफी समय तक विधायक भी रहीं हैं. 

    बात पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की तो उन्हें लोकसभा चुनाव में हार के बाद कोई खास पोजीशन नहीं दी गई है. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल रघुवर दास भी अपनी कुर्सी छोड़ वापस झारखंड लौटे है तबसे उन्हें भी किसी बड़ी जिम्मेदारी से बंधा नहीं गया है. हालांकि चर्चाओं का बाजार झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के समय भी तेज़ था. चर्चा थी कि रघुवर दस को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है पर अंत में आदित्य साहू को यह जिम्मेदारी दी गई. ऐसे में राजसभा चुनावों को लेकर रघुवर दस के नाम की भी चर्चा तेज़ है. 

    भाजपा के अंदर यह भी चर्चा है कि इस बार पार्टी झारखंड से ही किसी चेहरे को राज्यसभा भेजने के पक्ष में है. इसी बीच एक पूर्व आईआरएस अधिकारी का नाम भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. इसके साथ ही कई पुराने और समर्पित कार्यकर्ता भी संगठन स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हुए हैं. पार्टी के भीतर लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है, जिससे साफ है कि भाजपा इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है.

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि भाजपा के पास कई योग्य और मजबूत चेहरे मौजूद हैं. प्रदेश नेतृत्व संभावित उम्मीदवारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजेगा, जिसके बाद दिल्ली स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि भाजपा पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभव रणनीति पर काम कर रही है.

    ऐसे में राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा के अंदर जारी मंथन और नेताओं की बढ़ती सक्रियता ने झारखंड की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अब सबकी निगाहें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगा. माना जा रहा है कि यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे झारखंड की आगामी राजनीतिक दिशा और दलों की रणनीति का भी संकेत मिलेगा.



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