अरे वाह! सरकारी अस्पताल में जन्मे नवजातों को मिलेगा सोने का तोहफा, सरकार ने शुरू की नई योजना

अरे वाह! सरकारी अस्पताल में जन्मे नवजातों को मिलेगा सोने का तोहफा, सरकार ने शुरू की नई योजना

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):सरकार की ओर से जनता के लिए आए दिन नई-नई योजनाएं लॉन्च की जाती हैं, जिनका एक ही मकसद होता है कि सीधे तौर पर जरूरतमंद लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके.इसी बीच सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए सरकार की ओर से बड़ी घोषणा की गई है और एक नई योजना की शुरुआत की गई है, जिसका नाम थाई मामन गोल्ड रिंग स्कीम है. इस योजना के तहत 22 जून 2026 के बाद सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले हर नवजात को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी.योजना की शुरुआत 15 सितंबर 2026 से होगी.

घोषणा से आम जनता में खुशी

आपको बता दें कि सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों और माताओं को कई तरह की सुविधाएं दी जाती है. इसमें बेटी के जन्म पर आर्थिक सहायता दी जाती है, वहीं जच्चा-बच्चा के पोषण और खाने-पीने के लिए भी सरकार की ओर से पैसे दिए जाते हैं, ताकि परिवार पर अतिरिक्त बोझ न बढ़े और बच्चा स्वस्थ रहे.वहीं, सोने की अंगूठी देने की घोषणा से आम जनता में काफी खुशी देखी जा रही है.

पीएम नरेंद्र मोदी की अपील के बीच कितना कारगर साबित होगी योजना ? 

वैसे तो केंद्र सरकार की ओर से साल 2026 में सोने की खरीदारी ना करने को लेकर लोगों से अपील की गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से खास अपील की है कि एक साल तक सोना न खरीदें.ऐसे में तमिलनाडु सरकार का यह फैसला कितना कारगर साबित होगा, यह देखने वाली बात होगी.आपको बता दें कि दक्षिण भारत में सोने को सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखा जाता है. ऐसे में बच्चों के जन्म के मौके पर सरकार की ओर से इस तरह का उपहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

755.83 करोड़ रुपये का सालाना बजट तय

आपको बता दें कि थाई मामन गोल्ड रिंग स्कीम को लेकर सरकार की ओर से औपचारिक मंजूरी भी मिल गई है, जिसके लिए करीब 755.83 करोड़ रुपये का सालाना बजट तय किया गया है. वहीं, योजना से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बिना किसी देरी के टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि योजना को जल्द लागू किया जा सके और लाभार्थियों को इसका फायदा मिल सके.तमिलनाडु सरकार का कहना है कि इस योजना से नवजात बच्चे और उसके परिवार को आर्थिक सहयोग मिलेगा. वहीं, इसके साथ तमिल सांस्कृतिक विरासत को भी प्रोत्साहन मिलेगा.