रात के सन्नाटे में किसी के होने का अहसास? भूत-प्रेत नहीं, इसके पीछे छिपा है ये वैज्ञानिक कारण

रात के सन्नाटे में किसी के होने का अहसास? भूत-प्रेत नहीं, इसके पीछे छिपा है ये वैज्ञानिक कारण

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): जरा सोचिए रात का समय हो, बंद कमरा, चारों तरफ पसरा सन्नाटा और अचानक से ऐसा महसूस होने लगे कि अंधेरे में से आपको कोई टकटकी लगाए देख रहा है. क्या आपने भी ऐसा अनुभव किया है. क्या आपको भी कभी इस तरह का खौफनाक अहसास किया है? तो आप अकेले नहीं है. कई लोगों को अक्सर ऐसा लगता है कि उनके पीछे कोई चुपचाप खड़ा है, तो कुछ को कमरे के किसी कोने में किसी धुंधली आकृति की मौजूदगी का भ्रम होता है. आम बोलचाल में कहे तो ऐसे अनुभवों को तुरंत भूत-प्रेत, ऊपरी साया या किसी अलौकिक शक्ति से जोड़ दिया जाता है. लेकिन विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा इस रहस्यमयी अहसास को किसी रूहानी ताकत का नहीं, बल्कि हमारे इंसानी दिमाग और शरीर की एक खास वैज्ञानिक स्थिति का नतीजा मानती है.

इस अजीबोगरीब अहसास के पीछे की सबसे बड़ी और मुख्य वजह मानसिक तनाव यानी स्ट्रेस को माना जाता है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव का असर केवल हमारे मूड या स्वभाव पर ही नहीं पड़ता, बल्कि यह हमारी सोचने-समझने और महसूस करने की क्षमता को भी पूरी तरह प्रभावित करता है. जब कोई व्यक्ति बहुत अधिक मानसिक दबाव या चिंता से गुजर रहा होता है, तो उसके शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) नाम का स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ने लगता है. यह हार्मोन सीधे हमारे मस्तिष्क को हर समय अत्यधिक सतर्क या 'अलर्ट मोड' पर रहने का सिग्नल भेजता है, जिसके कारण शरीर एक अनजाने डर की स्थिति में आ जाता है.

मस्तिष्क की इस अत्यधिक सतर्कता वाली स्थिति को मनोविज्ञान की भाषा में "हाइपरविजिलेंस" (Hypervigilance) कहा जाता है. हाइपरविजिलेंस की स्थिति में इंसान का दिमाग अपने आसपास की सामान्य चीजों और बेहद धीमी आवाजों पर भी जरूरत से ज्यादा ध्यान देने लगता है. ऐसी मानसिक स्थिति में रात के सन्नाटे में होने वाली छोटी से छोटी हलचल भी बहुत डरावनी महसूस होने लगती है. उदाहरण के लिए, छत के पंखे की लगातार आने वाली आवाज, हवा से खिड़की का हल्का सा हिलना, दीवारों की परछाई या किसी छोटी चीज के गिरने की सामान्य आवाज को भी दिमाग किसी बड़े खतरे या भूत-प्रेत के रूप में व्याख्यायित (Process) करने लगता है.

तनाव के अलावा, नींद की लगातार कमी होना भी इस भ्रम की एक बहुत बड़ी और वैज्ञानिक वजह है. आजकल देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना, काम का अत्यधिक दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों की नींद का पूरा चक्र बिगड़ चुका है. वैज्ञानिक शोधों और न्यूरोलॉजिकल रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि जो लोग लगातार कम सोते हैं, उन्हें इस तरह के अजीबोगरीब और डरावने अनुभव होने की संभावना दूसरों से कई गुना ज्यादा होती है. जब मानव मस्तिष्क को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह दिनभर की जानकारियों और दृश्यों को सही तरीके से व्यवस्थित नहीं कर पाता, जिसके कारण जागते हुए भी व्यक्ति को अजीब परछाइयाँ दिखने लगती हैं.

यदि आपको भी अक्सर रात में किसी की मौजूदगी का अहसास होता है, तो डरने के बजाय अपनी जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव करने की जरूरत है. सबसे पहले अपनी दिनचर्या में सुधार करें और कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी व सुकून भरी नींद जरूर लें. रात को सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से दूरी बना लें, ताकि दिमाग शांत हो सके. इसके अलावा, तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान (Meditation) या अपनी पसंद की हॉबी को समय दें. यदि इन बदलावों के बाद भी यह समस्या लगातार बनी रहती है और आपका डर बढ़ता जाता है, तो किसी अच्छे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Mental Health Expert) से सलाह लेना सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है.