रांची(RANCHI): संथाल परगना प्रमंडल बीते कुछ साल से सुर्खियों में है. यहां एक तरफ बांग्लादेशी घुसपैठ का दावा किया जाता है तो दूसरी तरफ इस दावे के बीच कई चौकाने वाले खुलासे सामने आते है. अब साहिबगंज जिले के एक पंचायत से पेंशन 335 मुस्लिम लाभुक को पेंशन का मामला सामने आया. चौकाने वाली बात है कि इस पंचायत में एक भी मुस्लिम परिवार रहता ही नहीं. ऐसे में सवाल है कि जब कोई परिवार रहता नहीं है तो फिर पेंशन किसके खाते में भेजी जा रही. क्या कनेक्शन कुछ और है या फिर एक बड़ा खेल चल रहा है.
हाल में साहिबगंज और पाकुड़ जिले में दो मामला सामने आए. पहले साहिबगंज जिले का जहां एक बिशुनपुर पंचायत में 335 ऐसे लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिया गया जो उस पंचायत तो छोड़िए जिले या राज्य के भी नागरिक नहीं है. यह 335 लोग कौन है इसकी तहकीकात करने में जिला प्रशासन जुटा है. साथ ही पंचायत पहुंच कर जांच की और फिर कंप्युटर ऑपरेटर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया. जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
अब इस पंचायत से पेंशन लेने वाले लोग कौन है. इसपर पंचायत के मुखिया और पंचायत प्रतिनिधि ने सवाल उठाया है. आखिर कैसे लाभ दिया गया है. पंचायत के मुखिया नीरज बेसरा का मानना है कि इस पंचायत में अधिकतर आबादी आदिवासी की है. एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है. ऐसे में जांच का विषय है कि जिन्हे पेंशन दिया गया वह कौन है.
वहीं पंचायत समिति सदस्य ने कहा कि यह मामला छोटा नहीं है. हाल में कई वजहों से साहिबगंज सुर्खियों में रहा है. ऐसे में कौन है वह जो पेंशन का लाभ ले रहे है और इनके पेंशन को स्वीकृति कैसे दी गई. इसकी भी जांच होनी चाहिए.
मामले का खुलासा होने के बाद बोरियों प्रखण्ड कार्यालय साहिबगंज के एडीसी पहुंचे. दस्तावेजों की जांच की और पूरे मामले की सच्चाई क्या है इसे जानने की कोशिश में लगे है.
कैसे हुआ खुलासा
इस मामले का खुलासा पंचायत सचिव की एक शिकायत के बाद हुआ. पंचायत में एक तारा देवी नाम की महिला पेंशन का लाभ उठा रही थी. जबकि उसकी उम्र 42 साल थी. इसके बावजूद उसके पेंशन को स्वीकृति दी गई. इसकी शिकायत पंचायत सचिव ने प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से की. जिसके बाद जांच जांच शुरू हुई. तो मामला इससे भी बड़ा निकल कर सामने आया.
इधर दूसरे तरफ पाकुड़ में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का खुलासा हुआ है. पाकुड़ जिले के नवरतनपुर पंचायत के रामचन्द्रपुर गाँव में एक युवक जन्म प्रमाण पत्र बना रहा था. लेकिन यह पत्र जाली था. जिसके बाद गाँव के ही कुछ लोगों ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस पहुंच आकर युवक को हिरासत में लेकर थाना चली गई. साथ ही पूरे मामले की तहकीकात में जुटी है. जिससे यह पता लगाया जा सके की आखिर कैसे फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाया जा रहा था.
यह फर्जी जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड का मामला साहिबगंज और पाकुड़ के लिए नया नहीं है. बीते 2025 में जब मुंबई में पुलिस ने बांग्लादेशी के खिलाफ अभियान चलाया. जिसमें विक्रोली में 14 लोगों को हिरासत में लिया. जिसमें खुलासा हुआ था की सभी के पास साहिबगंज का आधार कार्ड था. वह खुद को झारखंड का नागरिक बता रहे थे. सभी महाराष्ट्र में रह कर फेरि का काम कर रहे थे और खुद को झारखंड का नागरिक बता रहे थे. लेकिन पुलिस जांच में उनके दावे खोखले साबित हुए थे. जिसके बाद साहिबगंज और पाकुड़ में आधार कार्ड सेंटर में भी कार्रवाई देखने को मिली थी.

