रांची डेस्क(RANCHI DESK): राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भाकपा-माले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस नेता के. राजू के बयान पर कड़ी नाराजगी जताई. पार्टी नेता हलधर महतो ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार की जिम्मेदारी लेने के बजाय भाकपा-माले पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है.
हलधर महतो ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में हलधर महतो के विधायक अनुप चटर्जी और चंद्रदेव महतो ने गठबंधन में हुई सहमति के मुताबिक कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट दिया था. दोनों विधायकों ने मतदान के बाद अपना वोट पोलिंग एजेंट को भी दिखाया था. ऐसे में यह कहना कि माले के विधायकों ने कांग्रेस को वोट नहीं दिया, पूरी तरह गलत है.
भाकपा-माले नेताओं ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद के. राजू लगातार अलग-अलग बयान दे रहे हैं. अगर उनके पास किसी तरह का कोई सबूत है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए. बिना प्रमाण के सहयोगी दलों पर आरोप लगाना ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले यह देखना चाहिए कि आखिर उसकी हार की वजह क्या रही.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने दावा किया कि मतदान के दौरान पोलिंग ब्यूरो के अध्यक्ष समेत सभी जिम्मेदार लोग मौजूद थे और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई थी. इसलिए भाकपा-माले पर लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है.
हलधर महतो ने कहा कि पार्टी हमेशा जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर संघर्ष करती रही है. कांग्रेस बार-बार झारखंड के साथ अन्याय करती रही है और अब अपनी राजनीतिक विफलता को छिपाने के लिए दूसरे दलों को निशाना बना रही है. नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने ही क्रॉस वोटिंग की है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी दूसरों पर डाली जा रही है.
भाकपा-माले का कहना है की यह पूरा मामला इंडिया गठबंधन को कमजोर करने की साजिश जैसा दिखाई देता है. गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से गलत संदेश जाता है. अगर कांग्रेस को कोई आपत्ति थी तो उसे गठबंधन के भीतर इस मुद्दे को उठाना चाहिए था.
भाकपा-माले ने बताया कि पार्टी की ओर से एक पत्र तैयार किया जा रहा है, जिसे मल्लिकार्जुन खरगे को सौंपा जाएगा. इसमें पूरे मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की जाएगी. नेताओं ने कहा कि वे लोकतंत्र की रक्षा चाहते हैं और जो भी गड़बड़ी हुई है उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

नेताओं ने कहा कि राज्य समिति की बैठक में पहले ही तय हो गया था कि भाकपा-माले कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगी और उसी फैसले का पालन किया गया. ऐसे में कांग्रेस किस आधार पर यह कह रही है कि माले ने उसे वोट नहीं दिया, यह समझ से परे है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी मांग की गई कि कांग्रेस भाकपा-माले पर लगाए गए आरोपों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे. साथ ही के. नेताओं ने कहा कि गठबंधन की मर्यादा बनाए रखने के लिए कांग्रेस को अपनी गलती स्वीकार करनी चाहिए और बिना सबूत आरोप लगाने से बचना चाहिए.
