टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड अब केवल खनिज संसाधनों में ही नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ चढ़ा कर हिस्सा ले रहा है. ऐसे में राज्य में शिक्षा क्षेत्र में हो रहे बदलावों के लिए भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. यही संदेश मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सामने रखा है. बैठक में मुख्यमंत्री ने झारखंड के विकास का खाका पेश करते हुए बताया कि राज्य में सरकारी स्कूलों की तस्वीर तेजी से बदल रही है और अब सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जैसे संस्थानों से पढ़कर छात्र IIT और मेडिकल कॉलेजों में चयनित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह बदलाव आने वाले वर्षों में झारखंड की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज निकालने वाले राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. राज्य की समृद्ध खनिज संपदा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उसे मानव पूंजी, उद्योग और रोजगार से जोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि झारखंड के संसाधनों का राज्य के भीतर ही वैल्यू एडिशन हो, खनिज आधारित उद्योग स्थापित हों और स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें. इसके लिए केंद्र सरकार से क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब विकसित करने में सहयोग की मांग की गई.
शिक्षा में बदलाव की नई कहानी
साथ ही मुख्यमंत्री ने बैठक में शिक्षा क्षेत्र में राज्य सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से रखा. उन्होंने कहा कि झारखंड में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की पहल ने सकारात्मक परिणाम देना शुरू कर दिया है. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र अब IIT, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने लगे हैं. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 5,000 उत्कृष्ट विद्यालय विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके. उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड में पीएम श्री स्कूलों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया. साथ ही राज्य में एनसीईआरटी का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग भी रखी, ताकि शिक्षकों और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हो सकें.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है. सारथी योजना के माध्यम से अब तक 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. राज्य सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), ड्रोन तकनीक और सोलर एनर्जी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित कर रही है. उन्होंने बताया कि राज्य हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है. इसके अलावा 53 हजार महिलाओं को भी तकनीकी और आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है.
स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाने की पहल
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि राज्य में 1276 दवा दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित की जा रही हैं, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर सस्ती और सुलभ दवाएं मिल रही हैं. उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी सीटों के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों के लंबित होने का मुद्दा भी उठाया और जल्द स्वीकृति देने का आग्रह किया. मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा.
आंगनबाड़ी, पोषण और कृषि पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से करीब 15 हजार के पास अभी भवन नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद पोषण अभियान और SAAMAR जैसी योजनाओं के माध्यम से कुपोषण को कम करने में सफलता मिली है. बच्चों को नियमित रूप से अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है और राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5,000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण करा रही है. कृषि क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि झारखंड में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं और 1.5 लाख एकड़ भूमि पर फलदार पौधों का रोपण किया गया है. झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने लगा है, जो राज्य की कृषि क्षमता को दर्शाता है.

