जमशेदपुर में अजय बर्मन हत्याकांड: 19 साल बाद कोर्ट ने कहा मॉब लिंचिंग नहीं, हुई थी हत्या

जमशेदपुर में अजय बर्मन हत्याकांड: 19 साल बाद कोर्ट ने कहा मॉब लिंचिंग नहीं, हुई थी हत्या

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): शहर के चर्चित अजय बर्मन हत्याकांड में नया मोड़ आया है. इस हत्याकांड को पुलिस ने मॉब लिंचिंग बताकर फाइल बंद के दी थी, लेकिन अब कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. हत्याकांड के 19 साल बाद कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जागी है. प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अरविंद कुमार-तृतीय की अदालत ने इसे सुनियोजित हत्या माना है. इसे संयोजित हत्या मानते हुए कोर्ट ने टीएम ज्वेलर्स के मालिक मिलन अडेसरा, मिलन के भतीजे संदीप अडेसरा व अन्य के खिलाफ हत्या की धारा के तहत संज्ञान में लिया है. आरोपियों को कोर्ट में तलब किया गया है. अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और अमिताभ कुमार मामले को देख रहे थे. दोनों अधिवक्ताओं ने कोर्ट के इस फैसले की सराहना की है. 28 वर्षीय वर्मन पेशे से सोनार थे. अपने घर पर ही गहनें बनाते थे. अजय बर्मन के घरवालों ने उनकी हत्या की जांच के लिए पीयूसीएल से आग्रह किया था. पीयूसीएल ने जांच में पाया गया था कि अजय बर्मन की मॉब लिंचिंग नहीं बल्कि हत्या हुई थी. 


बकाया पैसे मांगने पर हुई थी हत्या
11 मई 2027 को अजय बर्मन की हत्या हुई थी. वे अपने काम के बकाया पैसे मांगने गोलमुरी के आकाशदीप प्लाजा स्थित टीएम ज्वेलर्स गए हुए थे. दुकान से ग्राहकों के जाने के बाद अजय के साथ दुकान के भीतर ही मारपीट हुई थी. आरोप लगा था कि टीएम ज्वेलर्स के मालिक मिलन अडेसरा, भीतजा संदीप अडेसरा, दुकान के स्टॉफ और भाड़े के गुंडों ने उसकी काफी पिटाई की थी. दुकान का सीसीटीवी कैमरा तक बंद कर दिया गया था. अजय के सिर पर स्टील के स्टूल से वार किया गया था. फिर अजय की घसीटकर दुकान के बाहर स्थित पार्किंग में फेंक दिया गया था. फिर आरोपियों ने इसे मॉब लीचिंग का रूप दिया था. 

पुलिस ने रची थी झूठी कहानी
आरोपियों ने पुलिस की मिलीभगत से इस हत्याकांड को मॉब लीचिंग का रूप दिया था. सिदगोड़ा के तत्कालीन थाना प्रभारी सकलदेव राम पर आरोपियों के साथ मिलकर मनगढ़ंत प्राथमिकी दर्ज की थी. प्राथमिकी में अजय बर्मन को रिजवान बताया गया था. कहा गया था कि अजय बम और पिस्तौल लेकर रंगदारी मांगने के लिए दुकान आया था. प्राथमिकी में लिखा गया था कि रंगदारी मांगने गए अजय को दुकान में मौजूद लोगों ने पकड़ लिया और पीट- पीट उसकी हत्या कर दी. पीयूसीएल की जांच में सामने आए था कि अजय की हत्या भीड़ ने नहीं बल्कि मिलन अडेसरा और उनके साथियों ने की थी.