धनबाद (DHANBAD) : जिले के बलियापुर क्षेत्र की 80 वर्षीय टूसिया मोहली संघर्ष और आत्मनिर्भरता की मिसाल हैं. आंखों की रोशनी चली जाने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. आज भी वह बांस से सूप, टोकरी और अन्य घरेलू सामान बनाकर अपना जीवन चला रही हैं. अपने बनाए सामान को बेचने के लिए वह सहारे के साथ बाजार तक पहुंचती हैं और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनी हुई हैं. उनकी कहानी लोगों को कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत न हारने की प्रेरणा देती है.
टूसिया मोहली वर्षों से बांस से घरेलू उपयोग की विभिन्न सामग्री तैयार करती हैं. सूप, टोकरी, सुप्ती, पंखा और दौरी बनाना उनका पुश्तैनी काम है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ उनकी आंखों की रोशनी भी चली गई, लेकिन उन्होंने अपने इस पारंपरिक रोजगार को नहीं छोड़ा. आज भी वह स्पर्श के सहारे बांस को पहचानती हैं, उसे काटती और छीलती हैं तथा बड़ी सावधानी से उपयोगी सामान तैयार करती है.
दिनचर्या भी किसी प्रेरणा से कम नहीं
उनकी दिनचर्या भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. तैयार सामान को बाजार तक पहुंचाना उनके लिए आसान नहीं होता. फिर भी वह किसी परिचित या परिजन का सहारा लेकर घर से निकलती हैं. सिर पर सामान रखकर पैदल ऑटो स्टैंड तक पहुंचती हैं और वहां से झरिया बाजार जाकर अपने हाथों से बनाए उत्पादों की बिक्री करती हैं. इन्हीं सामानों की बिक्री से होने वाली आय उनके जीवन-यापन का मुख्य आधार है.
इच्छा और आत्मविश्वास आज भी बरकरार
टूसिया मोहली का कहना है कि मेहनत करना उन्होंने कभी नहीं छोड़ा. भले ही आंखों की रोशनी चली गई हो, लेकिन काम करने की इच्छा और आत्मविश्वास आज भी बरकरार है. यही वजह है कि वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने हुनर के बल पर जीवन की गाड़ी आगे बढ़ा रही हैं.
स्थानीय लोगों का मानना है कि टूसिया मोहली जैसी मेहनती और आत्मनिर्भर महिला को सरकारी योजनाओं तथा सामाजिक संस्थाओं से सहयोग मिलना चाहिए. यदि उन्हें आर्थिक सहायता और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए तो उनका जीवन और आसान हो सकता है. साथ ही उनका यह पारंपरिक हुनर भी नई पीढ़ी तक पहुंच सकेगा.
टूसिया मोहली की कहानी यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर हर चुनौती का सामना किया जा सकता है.
रिपोर्ट - नीरज कुमार

