धनबाद(DHANBAD) | झारखंड राज्य सभा चुनाव को लेकर उठा विवाद अब रांची से चलकर बिहार पहुंच गया है. अभी 2 दिन पहले ही झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि हेमंत सोरेन अब केवल 50 विधायकों के ही नेता हैं. मतलब 34 झामुमो के और 16 कांग्रेस के. इसके बाद बिहार के पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भी चुनाव को लेकर मोर्चा खोल दिया है और छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड, बिहार के नेताओं पर कई आरोप लगाए है. यह सब आरोप उन्होंने संवाददाता सम्मेलन कर लगाया है. उनका आरोप है कि छत्तीसगढ़ से राशि मंगवाई गई. फिर इसे विभिन्न स्रोतों से पहुंचाया गया. उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच की मांग उठाई है.
धनबाद के एक कोयला कारोबारी भी निशाने पर ---
उन्होंने झारखंड के ठेका कंपनी पर भी सवाल किया है, तो धनबाद के एक कोयला कारोबारी को भी निशाने पर लिया है. कहा है कि धनबाद के कोयला कारोबारी के यहां अभी हाल ही में ईडी की रेड हुई थी. उन्होंने कहा है कि लालू प्रसाद यादव अगर आज सक्रिय होते तो राजद के विधायक भाजपा समर्थित उम्मीदवार को वोट नहीं करते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वामपंथी पार्टियों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को वोट नहीं किया है. उनका आरोप है कि बिहार में एल ओ पी पद को लेकर धमकी दी गई. यह धमकी एक नेता के माध्यम से पहुंचाई गई. कहा गया कि बिहार में सिर्फ एक विधायक के चलते एल ओ पी बची हुई है, अगर दो विधायकों को तोड़ लिया जाए तो एल लोपी समाप्त हो जाएगी। इसके अलावे ईडी की भी धमकी दी गई.
धनबाद -रांची परिक्षेत्र के दो कांग्रेस के विधायकों पर दवाब ----
यह भी आरोप लगाया कि एक विधायक को यह फार्मूला बताने को कहा गया कि राजद , कांग्रेस के बिना भी कैसे झारखंड में सरकार चल सकती है. उन्होंने यह भी कहा है कि धनबाद परिक्षेत्र के एक कांग्रेस विधायक और रांची परिक्षेत्र के दूसरे विधायक पर दबाव डाला जा रहा है. यह अलग बात है कि धनबाद परिक्षेत्र के कांग्रेस विधायक कौन है और रांची परिक्षेत्र के कांग्रेस विधायक कौन हैं? इनका नाम उन्होंने सार्वजनिक नहीं किया है. उन्होंने राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है.
झारखंड के दो राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव हुआ था.------
उल्लेखनीय है कि झारखंड के दो राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव हुआ था. झामुमो ने वैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया था तो कांग्रेस की ओर से प्रणव झा को उम्मीदवार उतारा गया था. भाजपा ने परिमल नाथवानी को समर्थन दिया था. चुनाव में बैजनाथ राम और परिमल नथवानी जीत गए, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार की हार हुई. इसके बाद यह विवाद बढ़ गया. चुनाव परिणाम आने के बाद ही झारखंड के कांग्रेस प्रभारी के राजू ने आरोप लगाया था कि राजद और माले ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं दिया है. झामुमो के चार और कांग्रेस के 16 विधायकों ने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया है. इसके बाद बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया . राजद ने भी रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार किया तो माले ने भी इसे पूरी तरह से गलत बताया।
माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने लिखा था पत्र -----
माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि कांग्रेस नेताओं की बोली पर पाबंदी लगनी चाहिए। माले के विधायक कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया है. फिर पार्टी को बदनाम क्यों किया जा रहा है? फिलहाल झारखंड में तो यह मामला शांत दिख रहा है लेकिन अब यह मामला बिहार में चर्चे में है. कांग्रेस प्रभारी के राजू ने 18 जून को परिणाम आने के बाद कहा था कि राजद और माले का वोट कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को नहीं मिला, इसलिए हार हुई. इसके बाद तो राजद और माले हाथ धोकर कांग्रेस के पीछे पड़ गए थे.

