टीएनपी डेस्क(TNP DESK): अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद 19 जून को दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर अहम बैठक होने जा रही है. यह बातचीत स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टाक रिजॉर्ट में होगी, जहां दोनों देश आगे की रणनीति और समझौते को लागू करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे.
इस समझौते का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत जैसे देशों को भी इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. खासकर आम लोगों की जेब पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.
पेट्रोल-डीजल के दाम में मिल सकती है राहत
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ गए थे. अगर शांति समझौते के बाद तेल की सप्लाई सामान्य हो जाती है तो कच्चे तेल की कीमतें घट सकती हैं. इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ सकता है.
एलपीजी(LPG) गैस की उपलब्धता बढ़ सकती है
भारत घरेलू गैस यानी एलपीजी के लिए भी काफी हद तक इम्पोर्ट पर निर्भर है. तेल और गैस की सप्लाई आसान होने से एलपीजी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है. इससे सरकार पर सब्सिडी का दबाव कम होगा और उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना बढ़ेगी.
फल-सब्जियां और खाने-पीने का सामान हो सकता है सस्ता
डीजल की कीमतें कम होने का फायदा सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहता. खेती, सिंचाई, कोल्ड स्टोरेज और माल ढुलाई में भी डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. जब ट्रांसपोर्ट की लागत कम होगी तो फल, सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.
कपड़े, कॉस्मेटिक्स और जूते-चप्पल पर भी असर
कच्चे तेल से बनने वाले कई कच्चे माल का उपयोग कपड़ा उद्योग, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और फुटवियर बनाने में किया जाता है. तेल सस्ता होने पर सिंथेटिक धागे, प्लास्टिक और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों की लागत घट सकती है. इससे रेडीमेड कपड़े, स्पोर्ट्स वियर, जूते-चप्पल, क्रीम, लोशन, लिपस्टिक और अन्य उत्पादों की कीमतों में कमी आ सकती है.
दवाइयां और मेडिकल सामान भी हो सकते हैं सस्ते
मेडिकल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद पेट्रोकेमिकल्स से तैयार किए जाते हैं. सिरिंज, ग्लूकोज बोतलें, मेडिकल ट्यूब, दस्ताने, मास्क और कुछ दवाइयों के उत्पादन की कीमत कम हो सकती है. इसका फायदा आम मरीजों को मिल सकता है.
किसानों को भी मिल सकता है फायदा
कई कीटनाशक, पेस्टिसाइड और खेती में उपयोग होने वाले उत्पाद पेट्रोलियम आधारित होते हैं. कच्चे तेल के दाम घटने से इनकी कीमतों में भी कमी आ सकती है, जिससे किसानों की लागत कम होगी.
हवाई यात्रा हो सकती है सस्ती
तेल की कीमत कम होने पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF भी सस्ता हो सकता है. इससे एयरलाइंस कंपनियों का खर्च घटेगा और भविष्य में यात्रियों को सस्ते हवाई टिकट मिल सकते हैं.
EMI पर भी पड़ सकता है असर
अगर तेल की कीमतों में लगातार गिरावट रहती है तो महंगाई दर भी कम हो सकती है. ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों को कम रखने या भविष्य में कटौती करने पर विचार कर सकता है. इससे होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI में राहत मिलने की संभावना बन सकती है.
साबुन, डिटर्जेंट, टायर और ऑटो पार्ट्स भी हो सकते हैं सस्ते
साबुन, डिटर्जेंट, प्लास्टिक पैकेजिंग, टायर और कई ऑटो पार्ट्स के निर्माण में पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल का उपयोग होता है. उत्पादन लागत कम होने पर इन उत्पादों की कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है.
कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला शांति समझौता भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय घटना नहीं, बल्कि आम लोगों के खर्च को कम करने वाली बड़ी आर्थिक राहत साबित हो सकता है. अगर तेल और गैस की सप्लाई सामान्य रहती है तो आने वाले समय में कई जरूरी चीजें सस्ती हो सकती हैं और महंगाई पर भी लगाम लग सकती है.
