टीएनपी डेस्क(TNP DESK): हवाई यात्रा को ईंधन की बढ़ती और घटती कीमतों के असर से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई योजना शुरू की है. इस योजना का नाम प्राइस स्टेबलाइजेशन स्कीम है. इसके तहत घरेलू एयरलाइंस अब तीन साल तक के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत पहले से तय कर सकती हैं. इससे एयरलाइंस को अपने खर्च का सही अनुमान लगाने में आसानी होगी.
नई व्यवस्था के अनुसार, जो एयरलाइंस इस योजना को चुनेंगी, उन्हें एटीएफ 115 रुपये प्रति लीटर की तय कीमत पर मिलेगा. इससे पहले इसकी कीमत करीब 104.93 रुपये प्रति लीटर थी. इसी बीच सरकारी तेल कंपनियों ने जेट फ्यूल की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी की है.
यह योजना पूरी तरह से वैकल्पिक है. यानी एयरलाइंस पर इसमें शामिल होने का कोई दबाव नहीं होगा. वे अपनी जरूरत के अनुसार फैसला कर सकती हैं. जो एयरलाइंस इस योजना में शामिल नहीं होंगी, उन्हें बाजार कीमत के अनुसार ईंधन खरीदना होगा. फिलहाल बाजार में एटीएफ की कीमत करीब 142 रुपये प्रति लीटर है.
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर नहीं झेलना पड़ेगा. अगर आने वाले समय में वैश्विक बाजार में तेल महंगा हो जाता है, तब भी योजना में शामिल एयरलाइंस को तय कीमत पर ही ईंधन मिलेगा. हालांकि अगर तेल की कीमतें कम होती हैं, तो योजना से बाहर रहने वाली एयरलाइंस को उसका लाभ मिल सकता है.
सरकार ने एटीएफ की कीमत तय करने के लिए एक विशेष फॉर्मूला बनाया है. इसमें ईंधन की मूल कीमत के साथ एयरपोर्ट शुल्क, तेल कंपनियों का मुनाफा और टैक्स भी जोड़े गए हैं. इसी आधार पर दिल्ली में एटीएफ की कीमत 115 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. मुंबई में यह लगभग 114.5 रुपये और चेन्नई में करीब 139 रुपये प्रति लीटर होगी.
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन महंगा हुआ था. इसके बावजूद भारत में घरेलू एटीएफ की कीमत लंबे समय तक स्थिर रखी गई. इससे सरकारी तेल कंपनियों को नुकसान भी उठाना पड़ा.
इसी नुकसान की भरपाई और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये के प्राइस स्टेबलाइजेशन फ्रेमवर्क को मंजूरी दी है. इसके तहत अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तय आधार मूल्य से ऊपर जाती हैं, तो सरकार तेल कंपनियों को आर्थिक मदद देगी. वहीं जब कीमतें कम होंगी, तो अतिरिक्त राशि वापस सरकारी खजाने में जमा कर दी जाएगी.
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से एयरलाइंस को राहत मिलेगी और विमानन क्षेत्र को अधिक स्थिरता मिलेगी. साथ ही ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाले बदलाव का असर भी कम होगा.

