कॉकरोचों ने मोमबत्तियां जलाकर दिवंगत विद्यार्थियों को दी श्रद्धांजलि, बोले - "हम न्याय लेकर रहेंगे"

कॉकरोचों ने मोमबत्तियां जलाकर दिवंगत विद्यार्थियों को दी श्रद्धांजलि, बोले - "हम न्याय लेकर रहेंगे"

टीएनपी(TNP): जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा विवाद को लेकर Cockroach Janata Party (CJP) का प्रदर्शन सोमवार को तीसरे दिन भी जारी रहा. प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. दिनभर जंतर-मंतर पर छात्रों, युवाओं और समर्थकों की मौजूदगी रही, जिन्होंने परीक्षा व्यवस्था में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया.

कल शाम प्रदर्शन के दौरान एक भावुक पल भी देखने को मिला. CJP के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने उन बच्चों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने NEET परीक्षा रद्द होने पर मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली. प्रदर्शनकारियों ने मोमबत्तियां जलाकर दिवंगत छात्रों को याद किया और उनके सम्मान में कुछ समय का मौन भी रखा. इस दौरान कई छात्र भावुक नजर आए. प्रोटेस्टर्स का कहना था कि परीक्षा विवाद का असर केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे हजारों छात्रों और उनके परिवारों पर मानसिक दबाव भी पड़ा है.

देर रात आंदोलन के दौरान नया विवाद भी सामने आया. CJP ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने रात के अंधेरे में धरना स्थल को छोटा करने की कोशिश की. संगठन का कहना है कि बैरिकेड्स को खिसकाकर प्रदर्शनकारियों की जगह कम करने की तैयारी की जा रही थी. जैसे ही प्रदर्शनकारियों को इसकी जानकारी मिली, वे मौके पर पहुंच गए और कोशिश को रोक दिया.

CJP ने कहा कि पुलिस की ओर से एक ट्रक को जंतर-मंतर के भीतर लाने की कोशिश की गई ताकि प्रदर्शन स्थल को और सीमित किया जा सके. हालांकि प्रदर्शनकारियों ने इसका भी विरोध किया. देर रात तक आंदोलनकारी धरना स्थल पर डटे रहे. इस दौरान कई लोग देशभक्ति गीत गाते हुए नजर आए और उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन छात्रों के अधिकारों और भविष्य की लड़ाई है.

अभिजीत दिपके ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि जब परीक्षा में कुछ मिनट की देरी तक स्वीकार नहीं की जाती, तो फिर छात्रों के भविष्य के साथ हुए इतने बड़े खिलवाड़ को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों की चिंता का सवाल है.

धरने में शामिल छात्रों ने भी अपनी परेशानियां साझा कीं. कई छात्रों ने कहा कि परीक्षा की तैयारी में महीनों और सालों की मेहनत लगती है. जब पेपर लीक या परीक्षा रद्द होने जैसी खबरें सामने आती हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है. कुछ छात्रों ने बताया कि दोबारा परीक्षा देने का दबाव मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है.

फिलहाल NEET विवाद देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. जंतर-मंतर पर चल रहा यह प्रदर्शन छात्रों की नाराजगी, उनकी चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग का बड़ा प्रतीक बनकर उभरा है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या फैसला लेती हैं.