टीएनपी डेस्क(TNP DESK): देश में NEET परीक्षा विवाद और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्रों और सामाजिक संगठनों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है. इसी कड़ी में बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें अभिनेता प्रकाश राज, सोनम वांगचुक तथा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके सहित कई लोग शामिल हुए. प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सुधार और कथित अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय करने की मांग उठाना था.
भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता इस कार्यक्रम में पहुंचे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर करता है, इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए. उनका मानना है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी छात्रों के विश्वास को कमजोर करती है.
सभा को संबोधित करते हुए अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और सवाल पूछने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले लोगों को डराकर या उन पर अलग-अलग तरह के आरोप लगाकर चुप नहीं कराया जा सकता. उन्होंने युवाओं से अपने अधिकारों और भविष्य के लिए जागरूक रहने की अपील की.
प्रकाश राज ने कहा कि देश के युवाओं को अपने भविष्य को लेकर गंभीर रहना चाहिए और व्यवस्था में सुधार की मांग लोकतांत्रिक तरीके से करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की समस्याओं को सुनें और उनका समाधान करें.
इस आंदोलन में शामिल सोनम वांगचुक ने भी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के विकास की सबसे महत्वपूर्ण नींव होती है और छात्रों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है. उनके अनुसार परीक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जिस पर हर छात्र और अभिभावक विश्वास कर सके.
प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका अभियान आगे भी जारी रहेगा. उन्होंने देशभर के युवाओं से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की मांग है.
कॉकरोच जनता पार्टी हाल के महीनों में चर्चा में आई है. यह एक व्यंग्यात्मक सामाजिक और राजनीतिक अभियान के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय मंच बन गई. संगठन बेरोजगारी, परीक्षा संबंधी विवादों और सरकारी संस्थानों में जवाबदेही जैसे विषयों को प्रमुखता से उठा रहा है.
बेंगलुरु में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों और शिक्षा सुधार की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा करना है.
बेंगलुरु में आयोजित यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर बढ़ती चिंता को दर्शाता है. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है.
