बंगाल की हेरिटेज "ट्राम सेवा" नहीं होगी बंद,अब विदेशी पहिये वाले डब्बे दौड़ेंगे ट्रैक पर

बंगाल की हेरिटेज "ट्राम सेवा" नहीं होगी बंद,अब विदेशी पहिये वाले डब्बे दौड़ेंगे ट्रैक पर

tnp desk :  पश्चिम बंगाल की हेरिटेज ट्राम  सेवा को फिर से रफ्तार मिल सकती है.  भाजपा सरकार ने इसे  फिर से पुनर्जीवित करने और आधुनिक बनाने की योजना की घोषणा की है.  परिवहन मंत्री के अनुसार पुराने और खराब हो चुके डब्बो  की मरम्मत की बजाय ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर विदेश से हल्के और आधुनिक ट्राम  चलाने  पर सरकार विचार कर रही है.  इस पर समीक्षा चल रही है.  आधुनिक ट्राम  चलने के फायदे -नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है.  

सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्राम  सेवा बंद नहीं होगी

हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्राम  सेवा बंद नहीं होगी।  परिवहन मंत्री के अनुसार ममता सरकार में मरणासन्न हुई इस सेवा को फिर से खड़ा करने की कोशिश की जा रही है.  बता दें कि अभी केवल दो रूटों  पर ट्राम  चल रही है.  सर्वे चल रहा है कि किन-किन रूटों  पर चलाया  जा सकता है.  बता दे कि बंगाल में 153 साल पुरानी ट्राम  सेवा फिलहाल लगभग ठप है.  केवल दो रूटों  पर यह  चल रही है.  एक आंकड़े के अनुसार 1873 में सियालदह से घोड़े द्वारा खींची जाने वाली पहली ट्राम  चली थी.  लेकिन उसके बाद यह सेवा बंद कर दी गई. 

कोलकाता ट्राम  कंपनी का रजिस्ट्रशन लन्दन में हुआ था 

 फिर कोलकाता ट्राम  कंपनी का गठन किया गया और 1980 को इसे  लंदन में  रजिस्टर्ड किया गया थे.  फिर ट्रैक बिछाए गए और उसके बाद यह सेवा शुरू हो सकी, एक समय था जब कोलकाता में ट्राम  सेवा ही पब्लिक कनेक्टिविटी का बड़ा माध्यम थी.  लेकिन धीरे-धीरे समय के थपेड़े की वजह से यह सेवा बंदी के कगार पर पहुंच गई.  ममता सरकार में निर्णय हुआ कि ट्राम  सेवा को बंद कर दिया जाए.  अब यह  लाभकारी नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार ने अब नए और आधुनिक ढंग से ट्राम  सेवा शुरू करने का प्रयास शुरू किया है.  देखना होगा कि कब लोगों को यह सुविधा मिल सकती है.  यह  अलग बात है कि अभी मेट्रो का जमाना है, ऐसे में ट्राम  सेवा कितनी कारगर होगी, इस पर भी सरकार विचार कर रही है.