रांची(RANCHI): आजादी के लिए हुए आंदोलन में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए हजारों सेनानी शहीद हो गए. इनमें से बहुत सारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी या तो इतिहास में कम है या फिर नहीं है. आजादी के बाद कांग्रेस के शासन में इतिहास लेखन में यह एक भेदभाव बरता गया. इतिहास में स्वतंत्रता आंदोलन में नेहरू और गांधी परिवार के योगदान की चर्चा ही प्रमुख रूप से होती रही. बहुत सारे की चर्चा तक नहीं हुई.

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यह बात भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने रांची में आयोजित एक कार्यक्रम में कही. उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन की एक विभाजन रेखा 1857 मानी जाती है लेकिन जनजातीय विद्रोह इससे 100 साल पहले से हो रहा था. आज के झारखंड समेत कई अन्य राज्यों में जनजाति समाज में संगठित होकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जान की आहुति दी. तेजस्वी सूर्या ने भगवान बिरसा मुंडा के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा को दक्षिण भारत में भी लोग बहुत सम्मान के साथ याद करते हैं. उन्होंने अपने मोर्चा के साथियों से आह्वान किया कि अपने-अपने क्षेत्र के वैसे गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से संपर्क करें. उनकी लड़ाई की कहानी को सामने लाएं ताकि नई पीढ़ी से अवगत हो सकें.रांची के कार्निवाल सभागार में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए.