टीएनपी डेस्क(TNP DESK): इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' इन दिनों दर्शकों के दिलों को छू रही है. फिल्म में प्यार, बिछड़न और इंतजार की कहानी को बेहद भावुक अंदाज में दिखाया गया है. बंटवारे के दर्द पर आधारित यह फिल्म लोगों को उन सच्ची प्रेम कहानियों की याद दिला रही है, जो 1947 के विभाजन के दौरान अधूरी हो गई थीं. ऐसी ही एक कहानी प्रीतम कौर और भगवान सिंह की है.
प्रीतम कौर और भगवान सिंह एक-दूसरे से प्यार करते थे और उनकी सगाई भी हो चुकी थी. दोनों ने साथ में जिंदगी बिताने के सपने देखे थे, लेकिन 1947 के बंटवारे ने उनकी दुनिया बदल दी. पाकिस्तान के गुजरांवाला में रहने वाली प्रीतम कौर को उनकी सुरक्षा के लिए परिवार ने अमृतसर भेज दिया. उन्हें अपने मंगेतर भगवान सिंह से मिले बिना ही घर छोड़ना पड़ा.
दूसरी ओर भगवान सिंह भी बंटवारे की परेशानी का सामना कर रहे थे. दंगों में उन्होंने अपने तीन भाइयों को खो दिया था. हालात इतने खराब थे कि उन्हें भी अपना घर छोड़कर अमृतसर आना पड़ा. अपने जरूरी दस्तावेज और कागजात एक छोटे से ब्रीफकेस में रखकर वे भारत पहुंचे. दोनों एक ही शहर में थे, लेकिन उन्हें एक-दूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
समय बीतता गया और दोनों को लगने लगा कि शायद अब उनकी मुलाकात कभी नहीं होगी. लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था. एक दिन अमृतसर के एक शरणार्थी शिविर में प्रीतम भोजन लेने के लिए लाइन में खड़ी थीं. तभी पीछे से किसी ने उनका नाम पुकारा. जब उन्होंने मुड़कर देखा तो सामने भगवान सिंह खड़े थे. अचानक हुई इस मुलाकात ने दोनों की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए.
बंटवारे के दर्द और बिछड़न के बाद आखिरकार दोनों फिर से मिल गए. मार्च 1948 में उन्होंने शादी कर ली और अपने नए जीवन की शुरुआत की. शादी के दिन प्रीतम ने वही फुलकारी जैकेट पहनी थी, जिसे वह बंटवारे के समय अपने साथ लाई थीं. वहीं भगवान सिंह का ब्रीफकेस भी उनकी यादों का हिस्सा बन गया.
आज प्रीतम कौर की फुलकारी जैकेट और भगवान सिंह का ब्रीफकेस अमृतसर के पार्टिशन म्यूजियम में सुरक्षित रखे गए हैं. ये दोनों चीजें सिर्फ सामान नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेम कहानी की निशानी हैं जिसने बंटवारे जैसी त्रासदी को भी मात दे दी. यही वजह है कि 'मैं वापस आऊंगा' जैसी फिल्में लोगों को सिर्फ एक कहानी नहीं दिखातीं, बल्कि इतिहास के उन अनकहे पन्नों से भी रूबरू कराती हैं, जहां प्यार ने हर मुश्किल के बावजूद अपनी मंजिल हासिल की थी.
