TNP DESK : 22 जून 1932 को जन्मे अमरीश पुरी भारतीय सिनेमा के ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने अपने दमदार अभिनय और गूंजती आवाज से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई. फिल्मों में उनके निभाए गए खलनायक के किरदार आज भी याद किए जाते हैं. खासकर "मोगैंबो खुश हुआ" संवाद ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कलाकारों में शामिल कर दिया. आज उनके जन्मदिन पर उनके फिल्मी सफर और योगदान को याद किया जा रहा है.
एक साधारण परिवार में हुआ था जन्म
अमरीश पुरी का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके बड़े भाई मदन पुरी पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेता थे. अमरीश पुरी भी फिल्मों में काम करना चाहते थे, लेकिन शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें फिल्मों में काम नहीं मिला और उन्होंने नौकरी करना शुरू कर दिया.
हालांकि, अभिनय के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ. उन्होंने थिएटर से अपने अभिनय सफर को आगे बढ़ाया. कई वर्षों तक रंगमंच पर काम करने के बाद उनकी प्रतिभा को पहचान मिली और धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में अवसर मिलने लगे.
हिंदी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई
1970 और 1980 के दशक में अमरीश पुरी ने हिंदी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई. शुरुआत में उन्होंने कई सहायक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन जल्द ही उनकी दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और शानदार अभिनय के कारण उन्हें खलनायक की भूमिकाएं मिलने लगीं.
अमरीश पुरी ने अपने करियर में 400 से अधिक फिल्मों में काम किया. उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए, लेकिन खलनायक के रूप में उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता मिली. उनकी मौजूदगी मात्र से पर्दे पर एक अलग ही प्रभाव दिखाई देता था. जब भी वह स्क्रीन पर आते, दर्शकों का ध्यान स्वतः उनकी ओर चला जाता था.
"मोगैंबो खुश हुआ"
1987 में रिलीज हुई फिल्म मिस्टर इंडिया ने उन्हें भारतीय सिनेमा का सबसे यादगार खलनायक बना दिया. इस फिल्म में उन्होंने "मोगैंबो" का किरदार निभाया था. उनका मशहूर संवाद "मोगैंबो खुश हुआ" आज भी लोगों की जुबान पर रहता है. यह किरदार भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे लोकप्रिय खलनायकों में गिना जाता है.
अमरीश पुरी ने सिर्फ हिंदी फिल्मों में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी. हॉलीवुड फिल्म Indiana Jones and the Temple of Doom में उनके अभिनय को भी काफी सराहा गया. इससे उन्हें वैश्विक पहचान मिली और भारतीय कलाकारों की प्रतिभा दुनिया के सामने पहुंची.
खलनायक के अलावा उन्होंने कई फिल्मों में सकारात्मक और भावनात्मक भूमिकाएं भी निभाईं. दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, घायल, करण अर्जुन, नायक, कोयला और विरासत जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब पसंद किया गया. पिता, जमींदार, नेता और समाज के प्रभावशाली व्यक्ति जैसे किरदारों में भी उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी.
फिल्म इंडस्ट्री में अमरीश पुरी को एक अनुशासित और समर्पित कलाकार के रूप में जाना जाता था. निर्देशक और सह-कलाकार उनके पेशेवर रवैये की हमेशा सराहना करते थे. उनकी मेहनत और अभिनय के प्रति समर्पण ने उन्हें सिनेमा जगत का सम्मानित कलाकार बनाया.
अभिनय की प्रशंसा
12 जनवरी 2005 को अमरीश पुरी का निधन हो गया, लेकिन उनके निभाए किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं. नई पीढ़ी भी उनकी फिल्मों को देखकर उनके अभिनय की प्रशंसा करती है.
आज, 22 जून को उनके जन्मदिन पर भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया जाता है. अमरीश पुरी ने साबित किया कि एक कलाकार अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर अमर हो सकता है. यही कारण है कि उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे महान अभिनेताओं में गिना जाता है.

