TNP DESK-बिहार के बहुचर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. सूचना के मुताबिक भरत तिवारी की मां के आवेदन पर एसडीपीओ, शाहपुर थाने के तत्कालीन एसएचओ समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. भरत तिवारी की मां आशा देवी ने एसपी को दिए आवेदन में कई गंभीर आरोप लगाए थे . उन्होंने कहा कि उनका बेटा बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं को लेकर लगातार प्रशासन से संघर्ष कर रहा था और लोगों की आवाज उठा रहा था. आशा देवी ने अपने आवेदन में कहा है कि पुलिस के सामने पहुंचने के बाद भारत तिवारी ने फेसबुक लाइव के दौरान अपने हाथ में मौजूद हथियार फेंक दिया था. उसने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया था.
परिजनों का आरोप है कि बावजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें पड़कर जमीन पर गिरा दिया। इसके बाद उस पर लगातार गोलियां चलाई गई. आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि एस डीपीओ के आदेश पर गोली चलाई गई. मां के आवेदन पर पुलिस अधिकारी और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी के बाद पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है. आशा देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके पुत्र भारत भूषण तिवारी की पुलिस ने गोली मारकर हत्या की है. घटना के दौरान उसने पुलिस के सामने आत्म समर्पण कर दिया था. उसके बाद पुलिस ने गोली मार दी.
आइये आपको बताते हैं कि भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अब तक क्या-क्या हुआ ?17 जून को पुलिस के अनुसार सुबह भरत तिवारी की गिरफ्तारी के लिए बिलौटी गांव में छापेमारी करने गई थी. पुलिस का दावा है कि भरत ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और उसके बाद मुठभेड़ हुई. भरत तिवारी का एक फेसबुक लाइव वीडियो भी सामने आया. वीडियो में खुद को निर्दोष बता रहा था. वीडियो के अंतिम हिस्से में वह हथियार फेंकते हुए दिखाई देता है और खुद को सरेंडर करने की बात कहता है. वह सरेंडर कर भी देता है और उसके बाद यहीं से पूरे मामले में सवाल उठने शुरू हुए.
भरत तिवारी की मां ने एसपी को दिए आवेदन में कहा कि उनका बेटा बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहा था. आवेदन के मुताबिक पुलिस टीम उसे विस्थापितों की समस्या दिखाने के बहाने अपने साथ ले गई थी. वहां फेसबुक लाइव के दौरान भरत ने हथियार फेंक दिया और आत्मसमर्पण कर दिया था. आशा देवी का आरोप है कि इसके बाद पुलिस कर्मियों ने उसे घेर लिया और जगदीशपुर एसडीपीओ के आदेश पर पांच गोलियां मार दी.
एनकाउंटर वाले दिन पहली एफआईआर दर्ज हुई. इसमें भरत तिवारी, उसके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई को आरोपी बनाया गया. भाई और पिता पर संरक्षण देने का आरोप लगाया गया. 17 जून की दोपहर दूसरी एफआईआर दर्ज की गई. इसमें पुलिस ने दावा किया कि दोबारा छापेमारी के दौरान भरत हथियार लेकर भाग रहा था. पुलिस के अनुसार उसे कई बार सरेंडर करने को कहा गया, लेकिन उसने कथित रूप से पुलिस वाहन पर गोली चलाई। . बाद में उसने आत्मसमर्पण का नाटक किया और फिर दोबारा फायरिंग की कोशिश की.एफआईआर के अनुसार आत्मरक्षा में एसटीएफ जवान में फायरिंग की, जिससे भारत घायल हुआ. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
18 जून को भरत तिवारी की मौत के बाद ग्रामीणों ने शव रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। पुलिस का आरोप है कि जाम हटाने पहुंची टीम पर पथराव किया गया और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई गई. इस मामले में कई नामजद और 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज की गई. 18 जून को भरत तिवारी की मां आशा देवी ने भोजपुर एसपी को आवेदन देकर मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि भरत ने सरेंडर किया था, बावजूद उसे गोली मारी गई. साथ ही यह भी कहा कि घटना के बाद परिवार को कई घंटे तक सही जानकारी नहीं दी गई.
20 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की जांच पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत न्यायाधीश से कराने की घोषणा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के हर पहलू की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है. सरकार चाहती है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आये. 22 जून को लॉ एंड ऑर्डर ए डीजी सुधांशु कुमार ने पटना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पुलिस टीम आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने गई थी. मामले को सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया और पुलिस के स्तर से गंभीर चूक हुई. इस बड़ी लापरवाही को देखते हुए विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है. मामले से जुड़े लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है. अब इस पूरे मामले की कमान शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपी गई है.
23 जून को बड़ी कार्रवाई हुई, आशा देवी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है. एफआईआर में जगदीशपुर के एसडीपीओ, तत्कालीन शाहपुर थाना अध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल है. इसके पहले पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया जा चुका है. इसमें तत्कालीन थाना अध्यक्ष भी शामिल हैं.

